12 सितंबर तक आदेश की पूरी पालना नहीं तो होगी दंडात्मक कार्रवाई
झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग ने नगर परिषद आयुक्त और उपखंड अधिकारी को आयोग के पुराने आदेशों की पालना के लिए 12 सितंबर 2026 तक अंतिम अवसर दिया है। इसके बाद लापरवाही पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
झुंझुनूं में उपभोक्ता आयोग के आदेशों की पालना को लेकर नगर परिषद और उपखंड अधिकारी के लिए अब अंतिम समय सीमा तय कर दी गई है।उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण और पुराने आदेशों की पालना सुनिश्चित कराने के लिए 12 सितंबर 2026 तक का अंतिम अवसर दिया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि तय समय तक आदेशों की पूरी पालना नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है।मामला मंड्रेला रोड स्थित मुख्यमंत्री जन सहभागिता आवास योजना के फ्लैटों से जुड़ा है। उपभोक्ता आयोग ने फ्लैट समय पर तैयार कर उपभोक्ताओं को उपलब्ध नहीं कराने के मामले में निर्णय दिए थे।
बताया गया कि नगर परिषद ने आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक अपील की, लेकिन वहां भी नगर परिषद को राहत नहीं मिली। इसके बाद आयोग के आदेश की पालना की जिम्मेदारी नगर परिषद पर बनी हुई है।आयोग के समक्ष पीड़ित उपभोक्ताओं की ओर से आवंटित फ्लैटों से संबंधित अपने विधिक अधिकारों का समर्पण पत्र और शपथ पत्र नगर परिषद के पक्ष में प्रस्तुत किए गए हैं।
इसके बाद नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर पात्र उपभोक्ताओं को अवार्ड राशि का भुगतान करवाने की कार्रवाई की जा रही है। जिन फ्लैटों के अधिकार उपभोक्ताओं ने नगर परिषद के पक्ष में समर्पित किए हैं, उनके विक्रय या नीलामी सहित अन्य अधिकार नगर परिषद को दिए जाने की प्रक्रिया भी बताई गई है।
उपभोक्ता आयोग के समक्ष 13 मार्च को जिला कलेक्टर, एडीएम एवं नगर परिषद प्रशासक, तत्कालीन एसडीएम हवाई सिंह यादव, कौशल्या बिश्नोई, तहसीलदार महेंद्र मुंड और नगर परिषद आयुक्त उपस्थित हुए थे।इस दौरान आयोग के आदेशों की पालना करने और अवार्ड राशि के भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए समय मांगा गया था।आयोग ने संबंधित अधिकारियों को सद्भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ समयबद्ध तरीके से आदेश लागू करने के निर्देश दिए थे।
आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने कहा है कि प्रशासन और नगर परिषद को दिया गया समय अब अंतिम चरण में है। इसके बावजूद आदेश की संपूर्ण पालना नहीं होने पर 12 सितंबर तक अंतिम अवसर दिया गया है।इसके बाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत कार्रवाई शुरू की जा सकती है। प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, आदेश की पालना में जानबूझकर लापरवाही पाए जाने पर एक लाख रुपये तक जुर्माना, तीन साल तक का कारावास या दोनों का प्रावधान बताया गया है।
उपभोक्ता आयोग ने राष्ट्रीय लोक अदालत को सिर्फ लंबित मुकदमों के निस्तारण तक सीमित नहीं रखते हुए आयोग के पूर्व आदेशों की पालना कराने का माध्यम भी बनाया है।आयोग के अनुसार पीड़ित उपभोक्ता अपनी समस्या न्याय टेबल पर रख सकते हैं और संबंधित कार्रवाई की रिपोर्ट 72 घंटे में तलब करने की व्यवस्था भी की जा रही है।उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए त्वरित न्याय दिलाने और आयोग के आदेशों की पालना नहीं होने पर सख्त कार्रवाई के कई मामले सामने आए हैं।
एक मामले में रिटायर्ड फौजी की शिकायत पर आयोग अध्यक्ष ने रविवार के अवकाश दिवस पर भी सुनवाई कर 24 घंटे में राहत दिलाने की कार्रवाई की थी। ब्यूरो रिपोर्ट झुंझुनू






