Archive Notice: This article was originally published on 3 फ़रवरी 2026.
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झुंझुनूं, काटली नदी बचाओ जन अभियान के संयोजक सुभाष कश्यप ने  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से उनके राजकीय आवास पर आयोजित जनसुनवाई में भेंट कर काटली नदी को पुनर्जीवित करने की मांग उठाई।

उन्होंने कहा कि सिंधु जल समझौते के अंतर्गत पाकिस्तान को दिया जाने वाला पानी, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत द्वारा रद्द किया गया, उस जल को काटली नदी में बाँध बनाकर पाइपलाइन के माध्यम से प्रवाहित किया जाए।

 काटली नदी पुनर्जीवन को लेकर प्रमुख मांगें

सरस्वती रूरल एंड अरबन डेवलपमेंट सोसाइटी, झुंझुनूं के अध्यक्ष सुभाष कश्यप ने मुख्यमंत्री को सौंपे मांग पत्र में कहा कि

  • काटली नदी क्षेत्र में जी-राम-जी योजना के तहत उपयोगी कार्य करवाए जाएं

  • वृक्षारोपण, समतलीकरण और सीमांकन किया जाए

  • नदी बहाव क्षेत्र को संरक्षित किया जाए

 नदियों को आपस में जोड़ने की मांग

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में केंद्र सरकार से

  • चंबल, काली सिंध, पार्वती, लूणी, साहबी, घग्घर, काटली, सोती, बनास, बाण सहित नदियों को आपस में जोड़ने

  • नदी बहाव क्षेत्र में जल दोहन नियंत्रित करने

  • ड्रोन के माध्यम से कृत्रिम वर्षा करवाने

  • काटली नदी की 1947 की राजस्व रिकॉर्ड स्थिति बहाल करने

की मांग की गई।

 अतिक्रमण मुक्त कर वन्य जीव अभ्यारण बनाने की मांग

कश्यप ने कहा कि काटली नदी के आसपास

  • बंजर, चारागाह एवं वन विभाग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाए

  • पूरे क्षेत्र को वन्य जीव अभ्यारण के रूप में विकसित किया जाए

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के आदेश पर काटली नदी से अतिक्रमण हटाने का महा अभियान चल रहा है, लेकिन भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

 प्रभावित लोगों की आजीविका की भी मांग

अतिक्रमण हटाने और आवंटन निरस्त होने से प्रभावित लोगों के लिए

  • पुनर्वास (विस्थापन)

  • अथवा आर्थिक सहायता

उपलब्ध करवाने की मांग भी मुख्यमंत्री से की गई।

 ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख

मांग पत्र में बताया गया कि

  • वैदिक काल में काटली नदी जयपुर के शाहपुरा से शुरू होकर

  • वर्तमान के सीकर, झुंझुनूं, चूरू, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर जिलों से बहते हुए

  • सिंधु नदी में मिलती थी

इसके किनारे ताम्रकालीन गणेश्वर और सुनारी सभ्यता विकसित हुई, जिनका संबंध सिंधु घाटी सभ्यता से रहा है। यह नदी उस समय प्रमुख व्यापार मार्ग भी थी।

 80 लाख से अधिक लोगों को होगा लाभ

सुभाष कश्यप ने कहा कि यदि काटली नदी पुनर्जीवित होती है तो

  • शेखावाटी क्षेत्र की 80 लाख से अधिक आबादी

  • सीधे तौर पर जल, पर्यावरण और आजीविका से लाभान्वित होगी

 नई आयोग की मांग

उन्होंने राज्य में सभी नदियों, नालों और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए
“राजस्थान नदी व जल संरक्षण आयोग” के गठन की भी मांग की।

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