Archive Notice: This article was originally published on 20 मई 2026.
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RBI Action : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक द्वारा जारी निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए यशवंत सहकारी बैंक लिमिटेड19 मई को तत्काल प्रभाव से इसका लाइसेंस रद्द कर दिया है। आरबीआई के इस फैसले के बाद 19 मई 2026 को कारोबार बंद होने के बाद बैंक अब कोई बैंकिंग गतिविधि नहीं कर पाएगा।

आरबीआई के अनुसार, बैंक के पास न तो पर्याप्त पूंजी बची थी और न ही भविष्य में आय की कोई संभावना दिखाई दे रही थी। बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा।

वर्तमान वित्तीय स्थिति में, बैंक अपने जमाकर्ताओं को पूरी राशि वापस करने में सक्षम नहीं था, जिसके कारण सार्वजनिक हित में इसके लाइसेंस को रद्द करने की आवश्यकता थी।

घबराने वाले ग्राहकों को राहत देते हुए 99.02 प्रतिशत जमाकर्ता अपनी पूरी जमा राशि वापस पाने के पात्र हैं। RBI ने स्पष्ट किया है कि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत प्रत्येक जमाकर्ता को 5 लाख रुपये तक की बीमा राशि मिलेगी।

रिकॉर्ड के अनुसार, डीआईसीजीसी 20 अप्रैल 2026 तक 106.96 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है। अब महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त और पंजीयक से बैंक को बंद करने और परिसमापक नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है।

केवल बैंक ही नहीं, आरबीआई ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है मई 2026 में एक बड़ी कार्रवाई में, देश भर की लगभग 150 एनबीएफसी कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र (सीओआर) को रद्द कर दिया गया है।

इनमें से अधिकांश कंपनियां दिल्ली (लगभग 67) और पश्चिम बंगाल (लगभग 75) से हैं इससे पहले, कर्नाटक का ‘द कारवार अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक’ और प्रसिद्ध ‘पेटीएम पेमेंट्स बैंक’ भी नियमों के उल्लंघन के लिए गिर गए हैं।

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