Archive Notice: This article was originally published on 9 जनवरी 2026.
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इन बेटियों को नहीं मिलेगा पिता की संपत्ति में हक

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अंतर्गत बेटियों को पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सा मिलता है। अगर किसी बेटी के पिता की मृत्यु 1956 के बाद हुई हो तो फिर घर की पैतृक संपत्ति पर 1956 का हिंदू उत्तराधिकार नियम लागू होगा लेकिन 1956 के पहले के स्थिति में यह नियम लागू नहीं होगा।

1956 से पहले जब हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम लागू हुआ था तब बेटियों को बराबरी का अधिकार नहीं दिया जाता था। 1956 के पहले बेटियों को पिता के संपत्ति में तभी अधिकार मिलता था जब उसका कोई भाई ना हो।

इन बेटियों को नहीं मिलेगा प्रॉपर्टी में हिस्सा

जिन बेटियों के पिता की मृत्यु 1956 से पहले हो चुकी है उन्हें पैतृक संपत्ति में कानूनी अधिकार नहीं मिलेगा। कई मामलों में अमिताभ अक्षर कानून को लागू किया गया है जो 1956 में हिंदू उत्तराधिकार लागू होने के पहले प्रभावित हुआ करता था।

अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि 1956 से पहले मृत्यु की स्थिति में बेटी पिता की संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं मानी जाएगी। 1956 के बाद की स्थिति में ही बेटियों को पिता की संपत्ति में अधिकार दिया जाएगा।

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