जयपुर, माल परिवहन के दौरान ई-वे बिल, वैध कर चालान और अन्य जरूरी दस्तावेजों में अनियमितताओं के मामलों में वाणिज्यिक कर विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। विभागीय अधिकारियों ने नागौर और चित्तौड़गढ़ जिलों में विभिन्न मार्गों पर वाहनों की जांच के दौरान कर दस्तावेजों में कई विसंगतियां पकड़ीं। कार्रवाई के दौरान एक मामले में 5.46 लाख रुपए की आईजीएसटी पेनल्टी जमा कराई गई, जबकि अन्य मामलों में जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
सिंथेटिक फ्लेवरिंग एसेंस वाले वाहन पर 5.46 लाख की पेनल्टी
नागौर सर्किल में दिल्ली से बेंगलुरु जा रहे एक वाहन की जांच के दौरान उसमें Synthetic Flavouring Essences का परिवहन पाया गया। जांच के समय माल के साथ वैध इनवॉइस और ई-वे बिल उपलब्ध नहीं था।
ड्राइवर की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में माल का मूल्य 70,800 रुपए और कर राशि 10,800 रुपए दर्शाई गई थी। भौतिक सत्यापन में माल का मूल्य 15.18 लाख रुपए निर्धारित किया गया। इसके बाद विभाग ने प्रकरण में 5,46,480 रुपए की आईजीएसटी पेनल्टी निर्धारित की, जिसे अधिकृत प्रतिनिधि ने जमा करा दिया।
जीरा और सरसों के परिवहन में ई-वे बिल नहीं मिला
नागौर सर्किल के अमरपुरा क्षेत्र में वाहन संख्या RJ19GL9100 को जांच के लिए रोका गया। वाहन जोधपुर से बागपत, उत्तर प्रदेश की ओर जीरा और सरसों लेकर जा रहा था।
जांच के दौरान वाहन के साथ ई-वे बिल उपलब्ध नहीं पाया गया। प्रस्तुत बिल के अनुसार माल का कर-पूर्व मूल्य 25.15 लाख रुपए और कर राशि 1,25,750 रुपए थी। विभाग ने संबंधित दोनों फर्मों की प्रारंभिक जांच शुरू की है। फिलहाल माल का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के बाद वास्तविक बाजार मूल्य और कर देयता निर्धारित की जाएगी।
चित्तौड़गढ़ में बिल और ई-इनवॉइस में भी विसंगतियां
चित्तौड़गढ़ सर्किल के पालखेड़ी, NH-48 क्षेत्र में वाहन संख्या RJ27GD6565 को जांच के लिए रोका गया। वाहन दिल्ली से अहमदाबाद की ओर SS Utensils और Electronic Items लेकर जा रहा था।
भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच में घोषित मात्रा से 18 गैस स्टोव और 48 लीटर सोल्डरिंग फ्लक्स अतिरिक्त पाया गया। इसके अलावा 24 इनवॉइस में बोवेब पोर्टल के अनुसार अमान्य प्राप्तकर्ताओं का विवरण सामने आया। वहीं 9 मामलों में संबंधित आपूर्तिकर्ताओं द्वारा ई-इनवॉइस जारी नहीं किए जाने की बात सामने आई।
प्रारंभिक जांच में कुछ इनवॉइस में माल का मूल्य कम दर्शाया गया प्रतीत हुआ, जिससे ई-वे बिल जनरेशन की देयता से बचने की आशंका जताई गई। प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार माल का कर योग्य मूल्य 4,22,940 रुपए था, जबकि विभाग ने प्रकरण में 9,30,300 रुपए की संभावित कर/दायित्व राशि निर्धारित की है। मामले में आगे की जांच और नियमानुसार कार्रवाई जारी है।
प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई
वाणिज्यिक कर विभाग के अनुसार माल के अंतरराज्यीय और राज्य के भीतर परिवहन के दौरान ई-वे बिल, वैध टैक्स इनवॉइस, ई-इनवॉइस तथा माल की वास्तविक मात्रा और मूल्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
विभागीय प्रवर्तन दलों की ओर से प्रमुख राजमार्गों और संवेदनशील मार्गों पर वाहनों की जांच जारी है। विभाग का उद्देश्य कर चोरी और फर्जी या अमान्य दस्तावेजों के जरिए कर अपवंचन पर रोक लगाने के साथ ईमानदार करदाताओं के लिए समान और पारदर्शी कारोबारी वातावरण सुनिश्चित करना है।






