जयपुर में 17 अगस्त 2026 को राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बढ़ रही साइबर ठगी को लेकर एडवाइजरी जारी की। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि फर्जी कॉल, वीडियो कॉल, नोटिस या गिरफ्तारी की धमकी से घबराने के बजाय सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत शिकायत करें।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह के अनुसार, साइबर ठग खुद को CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED), कस्टम या ATS का अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। फर्जी वारंट और समन भेजकर पीड़ितों को डराया जाता है और वीडियो कॉल के जरिए उन्हें लगातार निगरानी में रखने का दबाव बनाया जाता है।

ऐसे शुरू होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’ का फर्जीवाड़ा

साइबर ठग फोन, WhatsApp या वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करते हैं। वे दावा करते हैं कि पीड़ित के आधार कार्ड, बैंक खाते या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला, ड्रग्स की तस्करी या किसी गैरकानूनी पार्सल से जुड़े मामले में हुआ है।

इसके बाद ठग पुलिस स्टेशन या किसी जांच एजेंसी के कार्यालय जैसा फर्जी माहौल तैयार करते हैं। पीड़ित को फर्जी नोटिस और गिरफ्तारी वारंट दिखाकर डराया जाता है तथा मामले को किसी के साथ साझा नहीं करने का दबाव बनाया जाता है।

कई मामलों में ठग बैंक खाते, FD और अन्य वित्तीय जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद ‘वेरिफिकेशन’ या रकम को सुरक्षित रखने का झांसा देकर पीड़ित से पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं।

राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल की एडवाइजरी में भी बताया गया है कि ठग खुद को पुलिस, CBI, RBI, ED या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर धमकी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए पैसे ऐंठते हैं।

संदिग्ध नोटिस-वारंट की ऐसे करें जांच

राजस्थान पुलिस के अनुसार, CBI ने ‘अभय’ नाम से AI आधारित पोर्टल शुरू किया है। इसके जरिए नागरिक पुलिस, न्यायालय या CBI के नाम से प्राप्त संदिग्ध नोटिस और वारंट की सत्यता की जांच कर सकते हैं।

अभय पोर्टल: abhay.cbi.gov.in

किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर भेजे गए दस्तावेज या नोटिस को देखकर तुरंत पैसे ट्रांसफर न करें। पहले संबंधित एजेंसी के आधिकारिक माध्यम से उसकी सत्यता की पुष्टि करना जरूरी है।

पुलिस ने बताया- ‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं

राजस्थान पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। केंद्र के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की एडवाइजरी भी कहती है कि वास्तविक कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी व्यक्ति को डिजिटल तरीके से गिरफ्तार नहीं करतीं।

पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि फोन या वीडियो कॉल पर धमकी मिलने पर घबराएं नहीं और आधार नंबर, PAN, बैंक खाते की जानकारी या OTP जैसी संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत

यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना देरी किए नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करना चाहिए। साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी की जा सकती है।

साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: cybercrime.gov.in

राजस्थान पुलिस ने साइबर ठगी के मामलों में 1930, 9256001930 और 9257510100 पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी दी है।

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