जयपुर, राजस्थान में किसानों को सब्सिडी वाला उर्वरक समय पर और निर्धारित दर पर उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने डिजिटल व्यवस्था का विस्तार करने का फैसला किया है।
27 अगस्त 2026 से डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन के वर्जन 3.77 को प्रदेश के 11 और जिलों में लागू किया जाएगा। इससे उर्वरक बिक्री की ऑनलाइन निगरानी के साथ कालाबाजारी और अनधिकृत बिक्री पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
इन 11 जिलों में शुरू होगी ऑनलाइन खाद बिक्री
नए डिजिटल सिस्टम को बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक में लागू किया जाएगा।
कृषि विभाग के अनुसार इससे पहले दो चरणों में 7 जिलों में यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है।
एक लाख से ज्यादा किसानों ने की यूरिया बुकिंग
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार पहले दो चरणों के परिणाम सकारात्मक रहे हैं।
अब तक एक लाख से अधिक किसानों ने करीब 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिजिटल बुकिंग की है। किसानों ने ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बताया है।
267 रुपये में मिलेगा यूरिया का बैग
सरकार किसानों को एक बैग यूरिया 267 रुपये की निर्धारित दर पर उपलब्ध कराती है। वहीं, प्रत्येक बैग पर करीब 1600 रुपये की सब्सिडी सरकार वहन करती है।
विभाग के अनुसार सब्सिडी वाले यूरिया और औद्योगिक ग्रेड यूरिया की कीमतों में अंतर होने के कारण कालाबाजारी और अनधिकृत उपयोग की संभावना रहती है। डिजिटल बिक्री व्यवस्था से इस पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है।
अब फार्मर आईडी से होगी खाद की बिक्री
नई व्यवस्था में किसानों को फार्मर आईडी के माध्यम से उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
राजस्थान में अब तक 88.85 लाख किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। कृषि विभाग जल्द ही एग्रीस्टैक कमिश्नरेट की स्थापना की दिशा में भी काम कर रहा है।
खाद की कालाबाजारी और टैगिंग पर लगेगी रोक
नई व्यवस्था में उर्वरक की प्रत्येक बिक्री डिजिटल रूप से दर्ज होगी। इससे विभाग को मांग, स्टॉक और वितरण की वास्तविक स्थिति की निगरानी करने में मदद मिलेगी।
इसके प्रमुख फायदे:
- किसानों को अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।
- निर्धारित दर से अधिक वसूली पर नियंत्रण रहेगा।
- डीलर खाद के साथ दूसरे उत्पादों की अनिवार्य टैगिंग नहीं कर सकेंगे।
- सब्सिडी वाला उर्वरक वास्तविक किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
- दुकानदार और अधिकारी वास्तविक स्टॉक देख सकेंगे।
- खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगेगा।
- सरकार सब्सिडी वाले उर्वरक के वितरण की बेहतर निगरानी कर सकेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी आसान होगी प्रक्रिया
कृषि विभाग के अनुसार डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन वर्जन 3.77 को अधिक सरल, तेज और स्थिर बनाया गया है।
इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी किसानों को बिना अनावश्यक परेशानी के उर्वरक खरीद की डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराना है।
विभाग ने डीलर्स और समितियों से मांगा सहयोग
कृषि विभाग ने उर्वरक कंपनियों, सहकारी समितियों और अधिकृत उर्वरक विक्रेताओं से नए सिस्टम के गो-लाइव के दौरान पूर्ण सहयोग करने की अपील की है।
विभाग का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से डिजिटल व्यवस्था का विस्तार कर इसे पूरे राजस्थान में लागू किया जा रहा है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
नई व्यवस्था से सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचाने, खाद की उपलब्धता की निगरानी करने और अनधिकृत बिक्री पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
खास तौर पर खाद की कमी या कालाबाजारी की शिकायतों के बीच डिजिटल रिकॉर्ड से विभाग को किस जिले में कितनी मांग है और कितना स्टॉक उपलब्ध है, इसकी निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से करने में मदद मिलेगी।






