राजस्थान में GST अनुपालन को लेकर वाणिज्यिक कर विभाग की कार्रवाई के दौरान श्रीगंगानगर, जोधपुर और जैसलमेर में करीब 1.44 करोड़ रुपये की संभावित राजस्व देयता सामने आई है। 14 अगस्त को हुई तीन सर्वे कार्रवाइयों में विभागीय टीमों ने GST रिटर्न, ई-वे बिल, ITC विवरण, लेखा रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध स्टॉक की जांच की।
विभाग के अनुसार सर्वे के दौरान कुल 29.13 लाख रुपये की राशि स्वैच्छिक रूप से जमा की गई। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े प्रारंभिक जांच पर आधारित हैं और विस्तृत सत्यापन के बाद वास्तविक कर देयता निर्धारित होगी।
श्रीगंगानगर में स्टॉक में 96 लाख से ज्यादा का अंतर
श्रीगंगानगर में सर्वे के दौरान विद्युत सामग्री के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया। रिकॉर्ड में स्टॉक का मूल्य करीब 1.51 करोड़ रुपये दर्शाया गया था, जबकि मौके पर करीब 55 लाख रुपये का भौतिक स्टॉक मिला।
इस तरह पुस्तकीय और भौतिक स्टॉक के बीच प्रथम दृष्टया करीब 96.35 लाख रुपये का अंतर पाया गया। विभाग के अनुसार इस विसंगति से संबंधित संभावित कर देयता के संबंध में करदाता ने 20.12 लाख रुपये स्वैच्छिक रूप से जमा किए।
इस राशि में 10.06 लाख रुपये CGST और इतनी ही राशि SGST शामिल है।
जोधपुर में ITC और ई-वे बिल की जांच
जोधपुर के बासवाना में GST रिटर्न और विभागीय डेटा के विश्लेषण के दौरान ITC से जुड़ा अंतर और कर भुगतान में विसंगति सामने आई। इसके साथ ही ई-वे बिल से संबंधित आंकड़ों की भी जांच की गई।
प्रारंभिक विश्लेषण में करीब 60 लाख रुपये की संभावित राजस्व देयता सामने आई। सर्वे के दौरान करदाता ने इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में 9 लाख रुपये SGST स्वैच्छिक रूप से जमा किए।
विभाग अब पुस्तकों, बिलों, रिटर्न, ITC के उपयोग और ई-वे बिल अनुपालन का विस्तृत सत्यापन कर रहा है।
जैसलमेर में करीब 39.82 लाख के कर का संभावित कम भुगतान
जैसलमेर में वित्तीय वर्ष 2023-24 के GST रिटर्न और विभागीय आंकड़ों की प्रारंभिक जांच में कर भुगतान में कमी की आशंका सामने आई। उपलब्ध विवरण के अनुसार करीब 19,91,099 रुपये CGST और इतनी ही राशि SGST, यानी कुल 39,82,198 रुपये के संभावित अल्प भुगतान की पहचान हुई।
विभाग बिक्री, टर्नओवर रिकॉर्ड, टैक्स इनवॉयस और कार्य अनुबंधों का पुस्तकों से मिलान कर रहा है। इस मामले में कर, ब्याज और पेनल्टी सहित करीब 60 लाख रुपये की संभावित राजस्व देयता का प्रारंभिक आकलन किया गया है।
विभाग ने कहा- जांच पूरी होने के बाद तय होगी वास्तविक देनदारी
वाणिज्यिक कर विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्वे के दौरान सामने आए आंकड़े प्रारंभिक संभावित राजस्व प्रभाव को दर्शाते हैं। दस्तावेजों के विस्तृत सत्यापन, रिकॉर्ड के मिलान और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कर देयता निर्धारित की जाएगी।
विभाग के मुताबिक GST अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए गलत ITC दावों, कर के कम भुगतान, स्टॉक में विसंगति और ई-वे बिल से जुड़ी अनियमितताओं पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।






