वाणिज्यिक कर विभाग ने जयपुर के मानसरोवर विस्तार स्थित केसर नगर क्षेत्र में संचालित मैसर्स नव्यता पर सर्वे कार्रवाई करते हुए ₹1.39 करोड़ से अधिक के संदिग्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की पहचान की है। विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई डेटा एनालिटिक्स और जोखिम विश्लेषण प्रणाली से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर की गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आई अनियमितताएं
प्रारंभिक जांच में विभाग ने पाया कि फर्म ने जीएसटी कानून के प्रावधानों के विपरीत इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया। फर्म मुख्य रूप से मैनपावर सप्लाई, स्टाफिंग और प्रशिक्षण सेवाएं प्रदान करती है।
विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान फर्म ने दिल्ली स्थित विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से दर्शाई गई खरीद के आधार पर ₹1.39 करोड़ से अधिक का ITC प्राप्त कर उसका उपयोग किया।
आपूर्तिकर्ताओं के GST पंजीकरण पाए गए निरस्त
विभागीय सत्यापन में यह सामने आया कि जिन आपूर्तिकर्ताओं के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया था, उनके GST पंजीकरण प्रारंभिक तिथि से ही निरस्त पाए गए। इसके चलते संबंधित लेन-देन की सत्यता पर गंभीर संदेह जताया गया है।
प्रारंभिक जांच में ₹1.39 करोड़ से अधिक के संदिग्ध ITC को चिह्नित किया गया है। इसके अलावा फर्म के क्रेडिट लेजर में ₹27.47 लाख का इनपुट टैक्स क्रेडिट वर्तमान में उपलब्ध पाया गया है।
जांच जारी, आगे होगी वैधानिक कार्रवाई
विभाग ने स्पष्ट किया कि ₹27.47 लाख केवल वर्तमान में उपलब्ध ITC की राशि है। विस्तृत जांच के दौरान फर्जी बिलों के माध्यम से किए गए वास्तविक लेन-देन, अन्य संबंधित फर्मों की भूमिका और संभावित कर अपवंचन की वास्तविक मात्रा का आकलन किया जा रहा है।
जांच पूरी होने के बाद कर अपवंचन की वास्तविक राशि निर्धारित की जाएगी। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई वाणिज्यिक कर विभाग की एनफोर्समेंट विंग-III, सर्किल-ए की टीम द्वारा की गई।






