राजस्थान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी संचालन को लेकर वीबी-जी राम जी आयुक्त पुष्पा सत्यानी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) की समीक्षा बैठक ली। बैठक में लंबित भुगतान, श्रमिक नियोजन और कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।
आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि मनरेगा के तहत लंबित कार्यों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
10 जुलाई तक सभी लंबित बिल भेजने के निर्देश
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सामग्री मद में आवंटित 735 करोड़ रुपये की राशि की समीक्षा की गई। आयुक्त ने जिलावार लंबित बिलों की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिए कि 10 जुलाई तक सभी बकाया बिल भुगतान के लिए अग्रेषित किए जाएं।
उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा नहीं करने वाले संबंधित कार्मिकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हर ग्राम पंचायत में शुरू हो कम से कम एक सामुदायिक कार्य
आयुक्त ने जुलाई माह में प्रारंभ किए गए कार्यों और श्रमिक नियोजन की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक सामुदायिक कार्य शुरू किया जाए।
उन्होंने आगामी पखवाड़े के दौरान कार्य की मांग करने वाले प्रत्येक जॉब कार्डधारी परिवार को नियमानुसार रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
कम प्रगति वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
बैठक में अपेक्षित प्रगति नहीं करने वाली पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा हुई। आयुक्त ने ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा कार्यों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में अतिरिक्त आयुक्त (प्रथम) हेमन्त स्वरूप माथुर, वित्तीय सलाहकार रमेश सांखला, परियोजना निदेशक रतन लाल अटल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।






