डीडवाना-कुचामन। शहरों में बढ़ता ट्रैफिक और सड़कों पर सीमित जगह अक्सर जाम की वजह बनती है। ऐसे में नावां शहर के पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के कक्षा 12वीं विज्ञान वर्ग के छात्र परमेश्वर कुमावत ने परिवहन व्यवस्था को लेकर एक अनोखी वैज्ञानिक परिकल्पना पेश की है।
परमेश्वर ने ऐसा डबल-लेवल ट्रांसपोर्ट मॉडल तैयार किया है, जिसमें सड़क के ऊपर एक अलग ऊंचाई पर बस चलाने का विचार है। वहीं, बस के नीचे बनी सामान्य सड़क पर कार और दूसरे वाहन चलते रह सकते हैं।
यानी एक ही मार्ग पर नीचे कारें और ऊपर बसें – दो स्तरों पर यातायात संचालित करने की परिकल्पना इस मॉडल में दिखाई गई है।
एक सड़क पर दो स्तरों में ट्रैफिक का आइडिया
छात्र के मॉडल का मुख्य विचार उपलब्ध सड़क स्थान का बेहतर इस्तेमाल करना है। सामान्य सड़क की चौड़ाई बढ़ाए बिना उसके ऊपर परिवहन का एक और स्तर विकसित करने की कल्पना की गई है।
परमेश्वर के अनुसार, यदि व्यस्त मार्गों पर भविष्य में ऐसी व्यवस्था तकनीकी रूप से संभव और सुरक्षित तरीके से विकसित की जाती है तो एक ही मार्ग से अधिक यात्रियों को ले जाने की संभावना तलाश की जा सकती है।
मॉडल का उद्देश्य बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच ट्रैफिक जाम को कम करने और सीमित सड़क स्थान का बेहतर उपयोग करने की दिशा में एक विचार प्रस्तुत करना है।
पेट्रोल-डीजल नहीं, इलेक्ट्रिक बस का विचार
परमेश्वर ने अपने मॉडल में सिर्फ दो स्तरों पर यातायात की परिकल्पना ही नहीं की, बल्कि इसे इलेक्ट्रिक परिवहन से जोड़ने का भी प्रयास किया है।
मॉडल में बस को इलेक्ट्रिक तरीके से चलाने का विचार रखा गया है। इसके साथ सोलर पैनल और बैटरी की व्यवस्था की परिकल्पना भी की गई है।
छात्र का मानना है कि इलेक्ट्रिक संचालन से ईंधन की खपत और प्रदूषण को कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड भी दौड़ सकेंगी!
परमेश्वर ने अपने मॉडल में आपातकालीन सेवाओं के इस्तेमाल की संभावना को भी शामिल किया है।
उसकी परिकल्पना के अनुसार जरूरत पड़ने पर इसी तरह की परिवहन व्यवस्था का इस्तेमाल एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड के लिए किया जा सकता है, ताकि भारी ट्रैफिक के बीच आपातकालीन सेवाओं को अपेक्षाकृत अलग रास्ता मिल सके।
मॉडल में छोटे अस्पताल जैसी आपातकालीन सुविधा की संभावना भी दर्शाई गई है।
अभी मॉडल, भविष्य की तकनीक पर सोच
यह ध्यान रखना जरूरी है कि परमेश्वर का बनाया मॉडल फिलहाल एक शैक्षणिक विज्ञान मॉडल और विद्यार्थी की परिकल्पना है। इसे वर्तमान परिवहन व्यवस्था में सीधे लागू करने का दावा नहीं किया गया है।
वास्तविक रूप से ऐसी व्यवस्था विकसित करने के लिए संरचना की मजबूती, यात्रियों की सुरक्षा, यातायात संचालन, ऊर्जा व्यवस्था, निर्माण लागत और तकनीकी व्यवहार्यता समेत कई पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करना होगा।
सरकारी स्कूल के छात्र की वैज्ञानिक सोच
परमेश्वर के इस मॉडल में बढ़ते शहरी यातायात की समस्या को अलग तरीके से देखने का प्रयास किया गया है। उसने सीमित सड़क स्थान, सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक ऊर्जा और आपातकालीन सेवाओं जैसे अलग-अलग पहलुओं को एक ही मॉडल में जोड़ने की कोशिश की है।
मॉडल के जरिए छात्र ने यह विचार सामने रखा है कि भविष्य में बढ़ते यातायात के बीच सड़क की मौजूदा जगह का अलग तरीके से इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा सकता है।






