जयपुर। विकसित राजस्थान@2047 के लक्ष्य के अनुरूप राज्य के प्रशासनिक तंत्र को अधिक सक्षम, दक्ष और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को बैठक आयोजित हुई।
बैठक में क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) की ओर से प्रशासनिक सुधार, मानव संसाधन आकलन, प्रक्रिया सुधार और डिजिटल परिवर्तन से संबंधित प्रस्तावित अध्ययन एवं कार्ययोजना का प्रस्तुतिकरण किया गया।
मानव संसाधन और कार्यप्रणाली का वैज्ञानिक आकलन
बैठक में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के लिए मानव संसाधन, कार्यप्रणालियों और तकनीकी प्रणालियों के बेहतर उपयोग पर चर्चा हुई।
इसके तहत विभागों के कार्यों, संगठनात्मक संरचना, कार्मिकों की संख्या और उनकी दक्षताओं का वैज्ञानिक आकलन करने पर जोर दिया गया।
प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाने पर फोकस
बैठक में दोहराव वाले कार्यों के लिए मानकीकृत एसओपी तैयार करने, अनावश्यक चरणों को समाप्त करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
इसके साथ ही डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा हुई।
प्रक्रिया मैपिंग और टाइम स्टडी के माध्यम से प्रत्येक कार्य में लगने वाले समय का आकलन किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक सरल, समयबद्ध और प्रभावी बनाना है।
RASIC मैट्रिक्स से तय होगी जिम्मेदारी
कार्य निष्पादन में स्पष्ट उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए RASIC मैट्रिक्स के उपयोग का भी प्रस्ताव है। इसके माध्यम से प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी और जवाबदेही निर्धारित की जाएगी।
इससे कार्यों के निष्पादन में अस्पष्टता कम करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।
सही कार्य के लिए सही कार्मिक और आधुनिक तकनीक
प्रस्तावित अध्ययन में वर्तमान और भविष्य की मानव संसाधन आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा। विभागों के दायित्वों, कार्यक्रमों और भविष्य के कार्यों के अनुरूप आवश्यक कार्मिक संख्या, कौशल और दक्षताओं का अध्ययन किया जाएगा।
इसके साथ ही विभिन्न स्तरों पर कार्यों के संभावित ओवरलैप, आवश्यक दक्षताओं और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण की भी समीक्षा होगी।
इसका उद्देश्य विकसित राजस्थान@2047 की जरूरतों के अनुरूप सही आकार, सही कौशल और डिजिटल रूप से सक्षम कार्यबल तैयार करना है।
6 विभागों में होगा पायलट डायग्नोस्टिक अध्ययन
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताया कि कार्ययोजना के अनुसार शुरुआती चरण में 6 विभागों में पायलट डायग्नोस्टिक अध्ययन किया जाएगा।
इसके बाद कैडर एवं गतिविधि संबंधी निर्णय, मैनपावर नॉर्म्स, कैडर रेशनलाइजेशन, भर्ती नियमों में आवश्यक सुधार, प्रक्रिया अनुकूलन और HR Stack की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
आगामी चरण में इस मॉडल को राज्यभर में लागू करने के लिए संबंधित विभागों को तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण उपलब्ध कराया जाएगा।
ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में QCI के महासचिव चक्रवर्ती टी. कन्नन, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव नवीन जैन, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के शासन सचिव डॉ. रवि कुमार सुरपुर, कार्मिक विभाग की शासन सचिव अर्चना सिंह, संयुक्त शासन सचिव डॉ. धीरज कुमार सिंह, वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव प्रताप सिंह तथा RITI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्येन्द्र कुमार (आईपीएस) सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
