राजस्थान सरकार ने भ्रष्टाचार और कदाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कई अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने दहेज उत्पीड़न, रिश्वतखोरी, पद के दुरुपयोग और राजकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही से जुड़े मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई और अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि लोकसेवकों के लिए ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है।
दहेज उत्पीड़न में दोषी चिकित्सा अधिकारी सेवा से बर्खास्त
सरकारी जानकारी के अनुसार, दहेज उत्पीड़न के एक मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए और 406 के तहत दोष सिद्ध होने पर एक चिकित्सा अधिकारी को राजकीय सेवा से पदच्युत करने का निर्णय लिया गया है।
इसके अलावा, राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के तहत दो सेवारत अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने तथा एक सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा अधिकारी की 20 प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया है।
रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग पर भी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने एक मामले में आरोपियों की मदद के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में तत्कालीन वृत्ताधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत अभियोजन स्वीकृति जारी की है।
इसके साथ ही भीलवाड़ा के तत्कालीन सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी राकेश खोईवाल के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी भी दी गई है।
आईएएस अधिकारी के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई
सरकार ने राजकीय भूमि को नीलामी के बजाय खांचा भूमि के रूप में आवंटित करने के मामले में एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी के खिलाफ अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की मंजूरी भी प्रदान की है।
इसके अलावा, सीसीए नियम-34 के तहत समीक्षा के पांच मामलों में संबंधित अधिकारियों की याचिकाएं खारिज करते हुए पहले से दिए गए दंडादेश को यथावत रखा गया है।
सरकार का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि भ्रष्टाचार, कदाचार और अनुशासनहीनता के किसी भी मामले में कोई रियायत नहीं दी जाएगी। ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर, निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।






