जयपुर, स्टेट जीएसटी विभाग ने संदिग्ध और फर्जी लेन-देन करने वाली फर्मों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की है। जयपुर और सीकर में किए गए सर्वे के दौरान विभाग ने 1.38 करोड़ रुपए से अधिक की संभावित कर देयता/कर चोरी से जुड़े मामले सामने आने का दावा किया है।
जांच में संदिग्ध आपूर्तिकर्ताओं से खरीद, फर्जी बिलिंग, संदिग्ध ई-वे बिल और अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी अनियमितताएं सामने आईं। विभाग ने दोनों मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन और आगे की जांच शुरू कर दी है।
जयपुर में राधे एंटरप्राइजेज के सर्वे में 85 लाख की संभावित देयता
जयपुर के माधोराजपुरा में 17 अगस्त को राधे एंटरप्राइजेज का सर्वे किया गया। विभागीय टीम ने फर्म द्वारा संदिग्ध आपूर्तिकर्ताओं से की गई खरीद से संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों की जांच की।
जांच के दौरान करीब 85 लाख रुपए की संभावित कर देयता सामने आई। कार्रवाई के दौरान फर्म की ओर से 10 लाख रुपए स्वैच्छिक रूप से जमा कराए गए।
विभागीय टीम ने मौके पर पंचनामा तैयार किया और आवश्यक दस्तावेजों के साथ लेखा पुस्तकों की जांच की। मामले में आगे की जांच जारी है।
सीकर में पारीक ट्रेडर्स पर कार्रवाई, 53.85 लाख की गड़बड़ी
सीकर की विशेष जांच टीम ने पारीक ट्रेडर्स का सर्वे किया। विभाग के अनुसार, जांच में फर्जी लेन-देन और करीब 53.85 लाख रुपए की संभावित जीएसटी वंचना/कर चोरी से जुड़ी अनियमितताएं सामने आईं।
जांच में पाया गया कि करदाता ने शुरुआत से ही ऐसे आपूर्तिकर्ताओं से खरीद दर्शाई, जिनका पंजीकरण पहले ही निरस्त किया जा चुका था। इसके अलावा सप्लायर्स की ओर से जारी क्रेडिट नोट्स से संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट को रिवर्स नहीं किए जाने की बात भी सामने आई।
विभाग ने संदिग्ध ई-वे बिल जनरेट किए जाने का भी उल्लेख किया है। इन सभी बिंदुओं का दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन किया जा रहा है।
फर्जी बिलिंग और अपात्र ITC पर विभाग की सख्ती
वाणिज्यिक कर विभाग के अनुसार, विशेष जांच अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि करदाता केवल वास्तविक और पात्र लेन-देन पर ही इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लें। साथ ही जीएसटी प्रावधानों के अनुपालन और सरकारी राजस्व की सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है।
विभाग ने करदाताओं से अपील की है कि वे जीएसटी नियमों का पूरी तरह पालन करें और केवल वास्तविक लेन-देन से संबंधित पात्र ITC का ही दावा करें।
दोनों मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन, आगे की जांच और नियमानुसार कार्रवाई जारी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी बिलिंग, बोगस लेन-देन और अपात्र ITC के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में सख्ती जारी रहेगी।






