जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जोधपुर ने हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं होने के मामले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं।
बघेरा निवासी मनोज कुमार सेन की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप शाह की एकलपीठ ने पूर्व में जारी आदेश की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने कहा कि 31 जनवरी 2025 के आदेश की पालना अगली सुनवाई तक की जाए। यदि आदेश की पालना नहीं होती है तो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक राकेश कुमार शर्मा को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी।
पत्नी की बीमारी के बीच लिया था VRS का फैसला
मामला सीकर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (परिवार कल्याण) कार्यालय में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत रहे मनोज कुमार सेन से जुड़ा है।
याचिका के अनुसार, उस समय मनोज कुमार की पत्नी कैंसर से पीड़ित थीं और उनका पूरा ध्यान पत्नी के उपचार पर था। पारिवारिक परिस्थितियों और मानसिक तनाव के बीच उन्होंने सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने का निर्णय किया।
उन्होंने 14 अक्टूबर 2024 को 1 फरवरी 2025 से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था।
पत्नी की तबीयत सुधरी तो फैसला बदलना चाहा
बाद में पत्नी की सर्जरी के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ। इसके बाद पत्नी ने भी मनोज कुमार को अपना निर्णय बदलने और सेवा में बने रहने के लिए कहा।
इसके बाद मनोज कुमार ने सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना इस्तीफा वापस लेने का आवेदन प्रस्तुत किया। हालांकि, याचिका दायर किए जाने तक इस संबंध में उन्हें कोई औपचारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ था।
31 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट ने दिया था आदेश
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजय महला और सुनीता महला ने मामले में पैरवी की।
अधिवक्ताओं के अनुसार, 31 जनवरी 2025 को जस्टिस अरुण मोंगा की एकलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की परिस्थितियों को देखते हुए अंतरिम राहत दी थी।
कोर्ट ने प्रथमदृष्टया माना था कि पत्नी की गंभीर बीमारी के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में याचिकाकर्ता से हुए निर्णय के लिए उसे कठोर परिणाम नहीं भुगतना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता को केवल उसके इस्तीफे के आधार पर सेवानिवृत्त होने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
इसके साथ ही कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता की सेवाएं उसके इस्तीफे के आधार पर समाप्त नहीं की जाएंगी।
एक साल बाद भी आदेश की पालना नहीं होने पर दायर हुई अवमानना याचिका
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर मामला दोबारा अदालत पहुंचा और अवमानना याचिका दायर की गई।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजय महला ने अदालत में कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक प्रार्थी को कार्यग्रहण नहीं करवाया गया है।
याचिका में विभाग पर आदेश की पालना में देरी का आरोप लगाया गया।
सरकार ने मांगा समय, कोर्ट ने दी चेतावनी
जस्टिस संदीप शाह की एकलपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पूर्व आदेश की पालना सुनिश्चित करने के लिए समय मांगा गया।
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से इस मांग का विरोध किया गया। अधिवक्ता ने दलील दी कि पूर्व आदेश की पालना के लिए सरकार पहले ही करीब एक वर्ष का समय ले चुकी है।
कोर्ट ने मामले को 27 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए तब तक आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अगली तारीख तक पूर्व आदेश की पालना नहीं हुई तो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक राकेश कुमार शर्मा को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।






