जयपुर, राजस्थान में बीट पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, जवाबदेह, जनोन्मुखी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।

राजस्थान पुलिस और ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D), गृह मंत्रालय, भारत सरकार के बीच सोमवार को पुलिस मुख्यालय, जयपुर में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

यह पहल DGP/IGP कॉन्फ्रेंस 2025 की सिफारिशों के अनुरूप तैयार एक वर्षीय एक्शन प्लान के क्रियान्वयन का हिस्सा है।

राजस्थान पुलिस और BPR&D के बीच एमओयू

पुलिस मुख्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान पुलिस के महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा और BPR&D के महानिदेशक आलोक मित्तल की मौजूदगी में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

राजस्थान पुलिस की ओर से उप महानिरीक्षक (क्राइम) दीपक भार्गव तथा BPR&D की ओर से उप महानिरीक्षक, नेशनल पुलिस मिशन डॉ. किरण कंग सिद्धू ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

‘पुलिसिंग में बीट ही बेसिक है’

एमओयू के बाद BPR&D के महानिदेशक आलोक मित्तल ने कहा कि पुलिसिंग में बीट ही बेसिक है।

उन्होंने बताया कि बीट पुलिसिंग के महत्व को देखते हुए DGP/IGP कॉन्फ्रेंस 2025 की सिफारिशों के आधार पर एक वर्षीय एक्शन प्लान तैयार किया गया है। गोवा के बाद राजस्थान पुलिस के साथ यह दूसरा एमओयू है।

उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत BPR&D राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए काम करेगा। इससे विभिन्न राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज से सीखने का अवसर भी मिलेगा।

आलोक मित्तल ने राजस्थान पुलिस के बीट क्लस्टर कॉन्सेप्ट की भी सराहना की।

तकनीक के सहयोग से धरातल पर दिखेगा बदलाव

राजस्थान पुलिस के महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने बीट पुलिसिंग को पुलिस और आमजन के बीच महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु बताया।

उन्होंने कहा कि परंपरागत बीट पुलिसिंग के कार्यों के साथ अब तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे धरातल पर बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

उन्होंने चंडीगढ़ की बीट बुक प्रैक्टिस की सराहना करते हुए इसे अपनाने की प्रतिबद्धता जताई।

उनके अनुसार यह एमओयू बीट पुलिसिंग को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह, जनसहभागी, सूचना आधारित और तकनीक-सक्षम बनाने में मदद करेगा। इससे अपराध की रोकथाम, पुलिस-जन संवाद और स्थानीय स्तर पर पुलिस की प्रभावशीलता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

सीकर और चूरू समेत 9 जिलों में पहले चरण की शुरुआत

एमओयू के तहत पहले चरण में प्रत्येक रेंज से एक-एक यानी कुल 9 जिलों का चयन किया गया है।

इन जिलों में शामिल हैं

  • सीकर
  • जयपुर उत्तर
  • धौलपुर
  • डीडवाना-कुचामन
  • कोटा शहर
  • डूंगरपुर
  • चूरू
  • जैसलमेर
  • जोधपुर पश्चिम

पहले चरण के अनुभव, उपलब्धियों और नवाचारों के आधार पर बाद में प्रदेश के शेष जिलों में भी नई बीट प्रणाली लागू की जाएगी।

जियो-मैप्ड बीट प्रोफाइल तैयार होंगे

नई व्यवस्था के तहत बीट संरचना को जनसंख्या, अपराध की स्थिति, भौगोलिक परिस्थितियों और शहरी-ग्रामीण स्वरूप के आधार पर युक्तिसंगत बनाया जाएगा।

बीट स्तर पर हॉटस्पॉट, संवेदनशील स्थान, महत्वपूर्ण संस्थानों और स्थानीय जरूरतों की पहचान की जाएगी। इसके आधार पर जियो-मैप्ड बीट प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे।

पुलिस और आमजन के बीच संवाद होगा मजबूत

नई बीट पुलिसिंग को जनसहभागिता से जोड़ने के लिए कम्युनिटी लाइजन ग्रुप (CLG), पुलिस मित्र और अन्य सामुदायिक माध्यमों को मजबूत किया जाएगा।

‘नो योर बीट ऑफिसर’ जैसी पहल के माध्यम से पुलिस और आमजन के बीच नियमित संवाद को संस्थागत स्वरूप देने पर जोर रहेगा।

विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों और कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों के साथ लक्षित संवाद को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

डिजिटल बीट प्रोफाइल और अपराध मैपिंग

बीट बुक, विलेज क्राइम नोट बुक, डिजिटल बीट प्रोफाइल और अपराध एवं हॉटस्पॉट मैपिंग के माध्यम से स्थानीय सूचनाओं के कानूनसम्मत संग्रह, सत्यापन और उपयोग की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

राजकॉप ई-बीट बुक की क्षमताएं बढ़ेंगी

बीट पुलिसिंग में तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के लिए राजकॉप ई-बीट बुक को और सशक्त किया जाएगा।

इसके तहत आवश्यकता के अनुसार GPS, जियो-टैगिंग, QR आधारित सुविधाएं, डिजिटल दस्तावेजीकरण और डैशबोर्ड जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जाएगा।

इससे बीट स्तर की गतिविधियों की निगरानी, सूचनाओं के अपडेट और पर्यवेक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

KPI के आधार पर होगी बीट पुलिसिंग की समीक्षा

नई व्यवस्था में की परफॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) के आधार पर बीट पुलिसिंग की प्रभावशीलता की समीक्षा की जाएगी।

बीट से लेकर पुलिस थाना, जिला/कमिश्नरेट और राज्य स्तर तक संरचित रिपोर्टिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। अच्छे कार्यों और नवाचारों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा।

बीट अधिकारियों की ट्रेनिंग पर जोर

बीट अधिकारियों और पर्यवेक्षण अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रारंभिक एवं रिफ्रेशर प्रशिक्षण, ट्रेनर्स की ट्रेनिंग और कैस्केड ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर को नोडल प्रशिक्षण संस्थान बनाया गया है। अकादमी सॉफ्ट स्किल्स और ट्रेनर्स की ट्रेनिंग से जुड़े कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

BPR&D देगा विशेषज्ञ मार्गदर्शन, राजस्थान पुलिस करेगी संचालन

एमओयू के तहत BPR&D सामान्य क्रियान्वयन ढांचा, प्रशिक्षण सामग्री, मॉडल प्रारूप, समीक्षा उपकरण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा।

वहीं बीट पुलिसिंग की मैदानी एवं परिचालन व्यवस्था, स्थानीय आदेश, मानव संसाधन, लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण, तकनीक और अन्य परियोजना संबंधी आवश्यकताओं की जिम्मेदारी राजस्थान पुलिस की रहेगी।

कार्यक्रम में महानिदेशक पुलिस कानून एवं व्यवस्था संजय अग्रवाल, महानिदेशक पुलिस यातायात मालिनी अग्रवाल सहित पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में महानिरीक्षक पुलिस (क्राइम) शरत कविराज ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके बाद BPR&D के अधिकारियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए।

The most trusted source for latest news, breaking news and detailed analysis of Jhunjhunu, Sikar and Churu district. We bring news directly to you from Jhunjhunu, Nawalgarh, Mandawa, Chirawa, Udaipurwati,...