राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने अंतर्राज्यीय ड्रग तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए 1.84 लाख रुपये के इनामी और राजस्थान के मोस्ट वांटेड ड्रग माफिया सुनील मीणा को मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जीरन क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। आठ महीने तक चली गुप्त निगरानी और ‘ऑपरेशन नीलमणि’ के तहत की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने बेहद पेशेवर रणनीति अपनाई।
एएनटीएफ के महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि आरोपी लंबे समय से राजस्थान और मध्य प्रदेश की पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। वह कई बार पुलिस पर फायरिंग कर फरार हो चुका था और उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
15 साल की उम्र से अपराध की दुनिया में रखा कदम
पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय सुनील मीणा ने वर्ष 2014 में महज 15 वर्ष की उम्र में डोडा-चूरा तस्करी करने वाले वाहनों की एस्कॉर्टिंग से अपराध की शुरुआत की थी। शुरुआत में प्रति वाहन 500 रुपये लेने वाला सुनील बाद में खुद तस्करी नेटवर्क का अहम हिस्सा बन गया और मध्य प्रदेश से राजस्थान तक मादक पदार्थों की सप्लाई करने लगा।
जांच में सामने आया कि वह पुलिस से मुठभेड़ कर तस्करी का माल सुरक्षित निकालने के लिए कुख्यात था। यही वजह थी कि कई बड़े तस्कर उसे अपने साथ रखने के लिए भारी रकम चुकाते थे।
19 से ज्यादा मुकदमे, कई जिलों की पुलिस पर कर चुका है फायरिंग
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सुनील मीणा के खिलाफ राजस्थान, मध्य प्रदेश और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) में एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, हत्या के प्रयास और धोखाधड़ी सहित 19 से अधिक मामले दर्ज हैं।
उस पर राजस्थान अपराध शाखा, पाली, उदयपुर, मध्य प्रदेश पुलिस और एनसीबी द्वारा कुल 1.84 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह राजस्थान पुलिस की नारको टॉप-25 सूची में भी शामिल था।
चरवाहा बनकर एएनटीएफ ने रचा ऑपरेशन का चक्रव्यूह
पुलिस के अनुसार सुनील अपने गांव में कम और आसपास के घने जंगलों में अधिक रहता था। उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एएनटीएफ के एक जवान को चरवाहे के वेश में करीब 15 दिन पहले इलाके में भेजा गया।
जांच में पता चला कि आरोपी अपनी पत्नी और सहयोगियों के जरिए गुप्त संकेतों से संपर्क बनाए रखता था। 7 जुलाई की रात अचानक हुई तेज बारिश पुलिस के लिए मददगार साबित हुई। बारिश के शोर में टीम ने घर की घेराबंदी कर दबिश दी।
ड्रम के पीछे छिपा मिला आरोपी, मोबाइल भी जब्त
दबिश के दौरान परिजनों ने पहले आरोपी के घर में होने से इनकार किया, लेकिन तलाशी में वह घर के अंदर एक बड़े ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा मिला। गिरफ्तारी के समय उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए गलत नाम भी बताया, लेकिन पूछताछ में उसने अपनी असली पहचान स्वीकार कर ली।
पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है। इसकी फोरेंसिक जांच के जरिए तस्करी नेटवर्क, सहयोगियों और अन्य फरार आरोपियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
प्रतापगढ़ पुलिस का भी मिला सहयोग
एएनटीएफ ने बताया कि मध्य प्रदेश सीमा से लगे दुर्गम इलाके में कार्रवाई के दौरान प्रतापगढ़ जिला पुलिस का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिला। भौगोलिक जानकारी और स्थानीय समन्वय के कारण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सका।
एएनटीएफ ने आमजन से अपील की है कि मादक पदार्थ तस्करी से संबंधित किसी भी सूचना को नियंत्रण कक्ष या व्हाट्सएप नंबर पर साझा करें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।






