राजस्थान में नीट यूजी काउंसलिंग-2026 को अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कई महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल ने राज्य के सभी राजकीय एवं निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के नोडल अधिकारियों की बैठक में निर्देश दिए कि मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी), राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और राज्य काउंसलिंग प्लेटफॉर्म के नए प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि काउंसलिंग प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रत्येक कॉलेज में होंगे अलग-अलग वेरिफाइंग अधिकारी
बैठक में बताया गया कि प्रत्येक मेडिकल और डेंटल कॉलेज में एक नोडल अधिकारी के साथ दो अलग-अलग वेरिफाइंग अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। इनमें एक अधिकारी ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन और दूसरा फिजिकल दस्तावेज सत्यापन की जिम्मेदारी संभालेगा।
आयुक्त ने निर्देश दिए कि ऑनलाइन सत्यापन निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए। देरी होने पर संबंधित सीट स्वतः निरस्त हो सकती है। साथ ही प्रवेश शुल्क और सीट त्याग से जुड़ी जानकारी भी समय पर पोर्टल पर अपडेट करनी होगी।
‘फ्रीज’ और ‘फ्लोट’ विकल्प में मिलेगी नई सुविधा
इस वर्ष काउंसलिंग प्रक्रिया में ‘फ्रीज’ और ‘फ्लोट’ विकल्प को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है।
- फ्रीज विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों को आवंटित कॉलेज में जाकर मूल दस्तावेजों का सत्यापन और प्रवेश शुल्क जमा कराना होगा।
- फ्लोट विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों को अगले चरण में सीट अपग्रेडेशन के लिए 100 प्रतिशत ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन की सुविधा मिलेगी। ऐसे छात्रों को तीसरे चरण या अंतिम आवंटन तक कॉलेज में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने या मूल दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
सीट ब्लॉकिंग रोकने के लिए नई व्यवस्था
राज्य काउंसलिंग बोर्ड और नीट कोर कमेटी राज्य राउंड-दो के बाद प्रवेश प्राप्त अभ्यर्थियों की सत्यापित सूची तुरंत अपलोड करेंगे। इससे विभिन्न राज्यों और ऑल इंडिया कोटा में सीट ब्लॉकिंग की समस्या कम होगी तथा रिक्त सीटें दोबारा काउंसलिंग पूल में उपलब्ध हो सकेंगी।
इस व्यवस्था से अधिक मेरिट वाले अभ्यर्थियों को भी बेहतर अवसर मिलने की संभावना है।
हेल्पडेस्क और विशेष सुविधाएं
बैठक में राज्य स्तरीय हेल्पडेस्क, कॉल सेंटर, ई-मेल सहायता प्रणाली, सोशल मीडिया सेल तथा हिंदी और अंग्रेजी में मार्गदर्शिका वीडियो उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
इसके अलावा एनआरआई श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए सर्वोच्च न्यायालय और एमसीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है। वहीं दिव्यांग अभ्यर्थियों का मूल्यांकन एनएमसी के संशोधित मानकों के अनुसार किया जाएगा तथा उनके लिए पृथक अपीलीय दिव्यांग मूल्यांकन बोर्ड भी गठित किया गया है।






