राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और मानव तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह युवाओं को विदेश में 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह वेतन का लालच देकर कंबोडिया, म्यांमार, वियतनाम और लाओस भेजता था, जहां उनके पासपोर्ट जब्त कर उन्हें साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था।
यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर की गई।
500 से अधिक राजस्थानियों के साइबर स्कैम सेंटर पहुंचने की आशंका
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि I4C के डाटा विश्लेषण में राजस्थान के 500 से अधिक लोगों की पहचान हुई है, जिन्हें इन देशों के साइबर स्कैम सेंटर भेजा गया था। इनमें से कई लोग अब तक भारत नहीं लौटे हैं।
भारत लौटे कुछ पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि वहां उनके पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए जाते थे। उन्हें रोजाना सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश और क्रिप्टो ठगी जैसे साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था। विरोध करने पर मारपीट और भारी जुर्माने की धमकी दी जाती थी।
ब्यावर से लेकर कोलकाता तक कार्रवाई
जांच के दौरान पुलिस ने राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX) और सागर सिंह निवासी ब्यावर को गिरफ्तार किया। इनके पास से मोबाइल फोन, पासपोर्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए, जिनसे विदेशी हैंडलर्स, वीपीएन, बायनेन्स, फर्जी जीपीएस और अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले।
पूछताछ के आधार पर पुलिस ने जीतूराज उर्फ जेम्स, रवि कुमार उर्फ माही और अनिल कुमार उर्फ डेविल को कोलकाता से उस समय गिरफ्तार किया, जब वे टूरिस्ट वीजा पर म्यांमार जाने की तैयारी कर रहे थे।
ऐसे करते थे करोड़ों की साइबर ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि स्कैम सेंटर पहुंचने के बाद आरोपियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था। इसके बाद वे सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर भारतीय नागरिकों से दोस्ती करते थे और धीरे-धीरे उनका विश्वास जीतते थे।
पीड़ितों की आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत जानकारी जुटाने के बाद उन्हें क्रिप्टोकरेंसी और निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा देकर लाखों रुपये निवेश करवाए जाते थे। ठगी की रकम म्यूल खातों के जरिए निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन और कंबोडिया में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाई जाती थी।
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी नेटवर्क में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
- राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX) कंबोडिया के स्कैम कंपाउंड में एचआर की भूमिका निभाता था और भारत से युवाओं की भर्ती कर उन्हें विदेश भेजने के बदले कमीशन लेता था।
- सागर सिंह फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर भारतीय नागरिकों से संपर्क करता और उनकी आर्थिक जानकारी जुटाकर टीम लीडर तक पहुंचाता था।
- जीतूराज उर्फ जेम्स क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन, म्यूल खाते, भारतीय सिम कार्ड और दस्तावेज विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाने का काम करता था।
- रवि कुमार उर्फ माही कंबोडिया में फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए ठगी की ट्रेनिंग देता था और बाद में म्यांमार स्थित नए स्कैम सेंटर जाने की तैयारी में था।
- अनिल कुमार उर्फ डेविल करीब एक वर्ष तक कंबोडिया के स्कैम सेंटर में सक्रिय रहा और उसे म्यांमार भेजे जाने से पहले कोलकाता से गिरफ्तार किया गया।
जांच जारी, और गिरफ्तारियां संभव
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पासपोर्ट, विदेशी वीजा दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियों की जांच जारी है और पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
राजस्थान पुलिस ने लोगों से विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले आकर्षक प्रस्तावों का सत्यापन करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल या निकटतम पुलिस थाने को देने की अपील की है।






