राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम थाना ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी और मानव तस्करी से जुड़े संगठित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इसी मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। अब इस नेटवर्क से जुड़े कुल आठ आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
यह कार्रवाई महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत की गई। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त सूचना, तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
विदेशी नौकरी का झांसा देकर बनाते थे साइबर गुलाम
पुलिस के अनुसार, गिरोह भारत के विभिन्न राज्यों, विशेषकर राजस्थान के युवाओं को 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह वेतन और आकर्षक विदेशी नौकरी का लालच देकर कंबोडिया, म्यांमार, वियतनाम, लाओस और थाईलैंड भेजता था।
विदेश पहुंचने के बाद कथित रूप से उनके पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर उन्हें साइबर स्कैम सेंटरों में बंधक बनाकर डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, क्रिप्टो फ्रॉड और जॉब स्कैम जैसे साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था।
तीन नए आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने इस मामले में आरिफ काठात उर्फ दीपू, कानू सिंह उर्फ पायथन और फिरोज काठात उर्फ माफिया को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार
- फिरोज काठात उर्फ माफिया पर सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर लोगों को कथित रूप से क्रिप्टो निवेश के नाम पर फंसाने और म्यूल अकाउंट्स संचालित करने का आरोप है।
- कानू सिंह उर्फ पायथन पर होटल नौकरी के नाम पर कंबोडिया जाकर कथित रूप से साइबर ठगी करने और अन्य भारतीय युवाओं को वहां भेजने का आरोप है।
- आरिफ काठात उर्फ दीपू पर फर्जी फेसबुक और व्हाट्सएप प्रोफाइल के जरिए निवेशकों को कथित रूप से नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर फंसाकर धन ऐंठने का आरोप है।
डिजिटल साक्ष्यों से खुल रही नेटवर्क की परतें
पुलिस ने बताया कि पहले गिरफ्तार आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन, पासपोर्ट, व्हाट्सएप चैट, वीपीएन और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से नेटवर्क के कई अहम सुराग मिले हैं। जांच अब मानव तस्करी, साइबर स्लेवरी और करोड़ों रुपये के कथित साइबर फ्रॉड से जुड़े वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच रही है।
हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगी।
राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी
राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि
- विदेश में नौकरी के ऑफर स्वीकार करने से पहले एजेंसी और कंपनी का सत्यापन करें।
- पासपोर्ट और पहचान संबंधी दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
- सोशल मीडिया पर निवेश, क्रिप्टो या गारंटीड रिटर्न के झांसे में न आएं।
- किसी भी संदिग्ध लिंक, ऐप या फाइल को डाउनलोड न करें।
- साइबर ठगी या ऑनलाइन धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।






