जयपुर/बीकानेर। राजस्थान सरकार ने शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी स्कूलों में अध्ययनरत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राज्य के सभी निजी स्कूलों को आरटीई के तहत प्रवेशित विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्य-पुस्तकें और आवश्यक शिक्षण सामग्री उपलब्ध करानी होगी।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस व्यवस्था का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ वित्तीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
मुफ्त किताबें नहीं दीं तो रुकेगा फीस रीइम्बर्समेंट
नए निर्देशों के तहत निजी स्कूलों को सरकार से मिलने वाला फीस रीइम्बर्समेंट तभी जारी किया जाएगा, जब स्कूल यह प्रमाणित करेंगे कि उन्होंने सभी आरटीई विद्यार्थियों को निःशुल्क किताबें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध करा दी है।
सरकार का यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें कुछ निजी स्कूलों पर स्टडी मटेरियल के नाम पर अभिभावकों से अतिरिक्त राशि वसूलने के आरोप लगे थे।
6.34 लाख से अधिक आवेदन, पूरी हुई लॉटरी प्रक्रिया
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के अनुसार, RTE सत्र 2026-27 के लिए 6.34 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए।
- ऑनलाइन आवेदन: 20 फरवरी से 10 मार्च 2026
- मुख्य लॉटरी परिणाम: 12 मार्च 2026
- प्रथम चरण का सीट आवंटन मार्च में पूरा हुआ।
- संशोधित नियमों के तहत दूसरे चरण और दस्तावेज सुधार की प्रक्रिया अप्रैल तक पूरी की गई।
हाई कोर्ट का अहम फैसला
इसी शैक्षणिक सत्र में राजस्थान हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि निजी स्कूलों को प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 1 तक सभी एंट्री लेवल पर 25 प्रतिशत सीटें आरटीई कोटे के तहत आरक्षित रखनी होंगी।
यदि किसी शुरुआती कक्षा में सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है, तो उसी कक्षा में आरटीई के पात्र विद्यार्थियों को भी प्रवेश देना अनिवार्य होगा।
कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
आरटीई के तहत आवेदन के लिए प्रमुख पात्रता शर्तें इस प्रकार हैं—
- परिवार की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये या उससे कम हो।
- PP3+ के लिए आयु 3 वर्ष से 4 वर्ष से कम तथा कक्षा 1 के लिए 6 वर्ष से 7 वर्ष से कम (31 जुलाई 2026 के अनुसार) हो।
- छात्र संबंधित स्कूल के वार्ड या ग्राम पंचायत क्षेत्र का निवासी हो।
एडमिशन नहीं मिले या पैसे मांगे तो कहां करें शिकायत?
यदि लॉटरी में चयन होने के बाद भी कोई निजी स्कूल प्रवेश देने से मना करता है या अतिरिक्त शुल्क की मांग करता है, तो अभिभावक संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से शिकायत कर सकते हैं।
बच्चे का अलॉटमेंट स्टेटस राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद (RAJPSP) के आधिकारिक पोर्टल पर देखा जा सकता है।






