जयपुर, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (RGHS) में पारदर्शिता बढ़ाने और अनावश्यक जांचों पर रोक लगाने के लिए लागू की गई प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था के बाद क्लेम में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
यह व्यवस्था 15 जुलाई 2026 से लागू की गई है। इसके तहत 2 हजार रुपए से अधिक की जांचों के लिए प्री-ऑथराइजेशन अनिवार्य किया गया है। साथ ही डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।
आरजीएचएस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 2026 में रूटीन जांचों के प्रिस्क्रिप्शन और अस्पतालों में प्रिस्क्रिप्शन के सत्यापन से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रिस्क्रिप्शन और जांचों की लगातार मॉनिटरिंग
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि आरजीएचएस में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के साथ योजना के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि प्रिस्क्रिप्शन, जांच और क्लेम से जुड़ी गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आरजीएचएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने कहा कि डिजिटल सिस्टम के माध्यम से अस्पतालों और डॉक्टरों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था से अनावश्यक जांचों और क्लेम पर नियंत्रण में मदद मिली है।
प्री-ऑथराइजेशन से बचने के लिए जांचों की तारीख बदली
आरजीएचएस प्रोजेक्ट अधिकारी डॉ. निधि पटेल के अनुसार 15 जुलाई से व्यवस्था लागू होने के बाद क्लेम में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
मॉनिटरिंग के दौरान ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें प्री-ऑथराइजेशन से बचने के लिए मरीजों की कई जांचें एक ही दिन कराने के बजाय अलग-अलग दिनों में लिखी गईं।
कुछ मामलों में तीन दिन की अवधि में अलग-अलग दिनों पर जांचों के लिए मरीजों को बार-बार अस्पताल बुलाया गया। इससे मरीजों को एक ही सप्ताह में दो-तीन बार अस्पताल आना पड़ा।
उन्होंने बताया कि 2 हजार रुपए से अधिक की जांचों को प्री-ऑथराइजेशन के दायरे से बाहर रखने के लिए इस तरह की गतिविधियों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है।
9 अस्पतालों का TMS और 3 डॉक्टरों की ID ब्लॉक
जांच के आधार पर 9 अस्पतालों का TMS तथा 3 डॉक्टरों की डॉक्टर ID ब्लॉक की गई है।
कोटा के दो अस्पतालों का TMS ब्लॉक किया गया। दोनों मामलों में एक ही चिकित्सक के एक ही दिन दोनों अस्पतालों में काम करने की बात सामने आई। इसी मामले में संबंधित डॉक्टर की ID भी ब्लॉक की गई।
अलग-अलग हैंडराइटिंग और सिग्नेचर से जुड़े मामले
अलवर के एक अस्पताल में एक डॉक्टर के नाम से लिखे गए प्रिस्क्रिप्शन में अलग-अलग हैंडराइटिंग और सिग्नेचर पाए गए।
अलवर के ही एक अन्य अस्पताल में कई ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन में डॉक्टर की सील और सिग्नेचर का एक जैसा पैटर्न सामने आया।
जोधपुर के एक अस्पताल में भी एक चिकित्सक के नाम से दो अलग-अलग हैंडराइटिंग और दो अलग सिग्नेचर पैटर्न पाए गए।
बिना पर्याप्त क्लिनिकल आधार के जांच लिखने का मामला
दौसा में एक अस्पताल द्वारा पर्याप्त क्लिनिकल फाइंडिंग और जस्टिफिकेशन के बिना जांचें लिखने तथा जरूरत से अधिक जांचों की सलाह देने का मामला सामने आया।
दौसा के ही एक अन्य अस्पताल में डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन के सिग्नेचर और मैनुअल प्रिस्क्रिप्शन के सिग्नेचर में अंतर सहित अन्य अनियमितताएं पाई गईं।
अलवर में पॉलीइथिलीन ग्लाइकोल और सीरम आयरन जांच की मॉनिटरिंग
अलवर के एक अस्पताल में करीब 65 मामलों में पॉलीइथिलीन ग्लाइकोल लिखे जाने की बात सामने आई। इनमें कई मामलों में इसके लिए संबंधित क्लिनिकल इंडिकेशन दर्ज नहीं था।
इसके अलावा कई मामलों में सीरम आयरन जांच भी स्पष्ट लक्षण, क्लिनिकल फाइंडिंग या डायग्नोसिस के बिना लिखे जाने की बात सामने आई।
बीकानेर और जयपुर में डॉक्टर ID ब्लॉक
बीकानेर के अस्पताल से जुड़े एक चिकित्सक की डॉक्टर ID भी ब्लॉक की गई है। अलग-अलग मरीजों की शिकायतों के बावजूद बार-बार समान जांचें लिखे जाने का मामला सामने आया।
जयपुर के अस्पताल से जुड़े डॉक्टर की ID अलग हैंडराइटिंग पाए जाने के कारण ब्लॉक की गई।
वहीं उदयपुर के एक अस्पताल का TMS भी विभिन्न मामलों के चलते ब्लॉक किया गया है।
मरीजों के हित में पारदर्शिता पर जोर
आरजीएचएस के अनुसार इस कार्रवाई का उद्देश्य उपचार और क्लेम की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना, अनावश्यक जांचों पर रोक लगाना और योजना का लाभ लेने वाले मरीजों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
आरजीएचएस की आधिकारिक व्यवस्था में अस्पतालों और डॉक्टरों की जानकारी तथा ब्लॉक किए गए अस्पतालों/फार्मेसी की सूचियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं।






