जूनियर रेजिडेंट या अन्य कार्मिक डॉक्टर की ओर से नहीं कर सकेंगे प्रमाणीकरण
जयपुर। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में चिकित्सकीय परामर्श और प्रिस्क्रिप्शन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए नए निर्देश जारी किए गए हैं।
अब हर RGHS प्रिस्क्रिप्शन को संबंधित एम्पैनल्ड चिकित्सक द्वारा व्यक्तिगत रूप से जांचना, सत्यापित करना और हस्ताक्षर एवं मुहर से प्रमाणित करना अनिवार्य होगा।
जूनियर रेजिडेंट या अन्य कार्मिक नहीं कर सकेंगे डॉक्टर के हस्ताक्षर
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें लाभार्थियों की प्रिस्क्रिप्शन पर्चियां जूनियर रेजिडेंट या अन्य कार्मिकों द्वारा तैयार और हस्ताक्षरित की जा रही थीं।
इन मामलों में संबंधित RGHS से संबद्ध पंजीकृत चिकित्सक (RMP) द्वारा पर्ची का सत्यापन और प्रमाणीकरण नहीं किया जा रहा था।
इसी को देखते हुए अब प्रिस्क्रिप्शन की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित चिकित्सक की तय की गई है।
क्लिनिकल जानकारी की अंतिम जिम्मेदारी डॉक्टर की
RGHS परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल के अनुसार, अस्पताल में संस्थागत नियमों के तहत प्रिस्क्रिप्शन तैयार करने, क्लिनिकल विवरण दर्ज करने या डेटा एंट्री में अन्य कर्मचारियों की सहायता ली जा सकती है।
हालांकि, रोगी के क्लिनिकल निष्कर्ष, निदान, दवाइयां, जांच और उपचार की अंतिम जिम्मेदारी एम्पैनल्ड चिकित्सक की ही होगी।
दूसरा व्यक्ति डॉक्टर की ओर से नहीं कर सकेगा हस्ताक्षर
नए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी अन्य व्यक्ति संबंधित चिकित्सक की ओर से प्रिस्क्रिप्शन पर हस्ताक्षर या प्रमाणीकरण नहीं कर सकेगा।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि RGHS के तहत जारी होने वाली चिकित्सकीय पर्ची की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट रहे।
नियमों का पालन नहीं करने पर क्लेम पर भी असर
RGHS के अनुसार, यदि कोई प्रिस्क्रिप्शन संबंधित चिकित्सक द्वारा विधिवत सत्यापित और प्रमाणित नहीं है, तो क्लेम की जांच और पुनर्भरण के दौरान उसे नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
ऐसे मामलों में संबंधित RGHS दिशा-निर्देशों और एम्पैनलमेंट की शर्तों के तहत उचित कार्रवाई की जा सकती है।
सभी संबद्ध अस्पतालों को तत्काल पालन के निर्देश
RGHS से संबद्ध सभी अस्पतालों को नए निर्देशों की तत्काल और सख्ती से पालना सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इन नियमों से प्रिस्क्रिप्शन में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने और योजना के तहत उपचार संबंधी रिकॉर्ड में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया है।






