जयपुर, राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में शुक्रवार को असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉलेज शिक्षा विभाग) भर्ती-2025 से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। RPSC की ओर से विस्तृत जवाब पेश किए जाने के बाद याचिकाकर्ता धर्मवीर मीणा के अधिवक्ता ने रिट याचिका वापस ले ली, जिससे आयोग के अनुसार भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है।
मामले में आयोग के अधिवक्ता एम.एफ. बेग ने न्यायालय के समक्ष विस्तृत जवाबदावा पेश किया। आयोग ने याचिका में गलत और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए जाने का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता पर शास्ति (जुर्माना) लगाने का अनुरोध भी किया।
30 जुलाई के अंतरिम आदेश के बाद भी जारी रही प्रक्रिया
यह मामला एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 13640/2026, धर्मवीर मीणा एवं अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य से संबंधित था। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 30 जुलाई 2026 को मामले में अंतरिम आदेश पारित किया था।
आयोग के अनुसार, इसके बाद भी भर्ती प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया गया और भर्ती के तहत साक्षात्कार के लिए सफल अभ्यर्थियों के परिणाम लगातार जारी किए जाते रहे।
922 पदों की वृद्धि पर क्या था विवाद?
आयोग ने न्यायालय में अपने पक्ष में कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का मूल विज्ञापन 18 सितंबर 2025 को जारी हुआ था। इससे पहले कार्मिक विभाग की 21 जुलाई 2025 की अधिसूचना के जरिए सेवा नियमों में संशोधन किया जा चुका था।
आयोग के मुताबिक, इस संशोधन में अतिरिक्त पदों की वृद्धि की सीमा 50 से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई थी। ऐसे में 574 पदों के मूल विज्ञापन के विरुद्ध 348 पदों की वृद्धि कर कुल 922 पद किए जाने के लिए 13 मई 2026 को जारी शुद्धि पत्र को आयोग ने नियमों के अनुरूप बताया।
आयोग ने की शास्ति लगाने की मांग
आयोग ने न्यायालय के समक्ष कहा कि याचिका और स्टे एप्लीकेशन में बताए गए तथ्य भ्रामक थे और इनके आधार पर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। आयोग ने गलत तथ्य प्रस्तुत करने और न्यायालय का महत्वपूर्ण समय व्यर्थ करने के आधार पर याचिकाकर्ता पर शास्ति लगाने का अनुरोध किया।
आयोग के अनुसार, उसके अधिवक्ता द्वारा तथ्यों को न्यायालय के सामने रखने के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।
बड़ी भर्तियों में पहले से कैविएट दाखिल करेगा आयोग
भर्ती प्रक्रियाओं को न्यायिक विवाद के कारण अचानक बाधित होने से बचाने के लिए आयोग ने भविष्य की रणनीति भी तय की है। आयोग के अनुसार, एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों वाली सभी भर्तियों में न्यायालय में पहले से कैविएट दाखिल की जाएगी, ताकि आयोग का पक्ष सुने बिना एकतरफा आदेश से भर्ती प्रक्रिया प्रभावित न हो।
आयोग ने बताया कि वर्तमान में करीब 3,000 न्यायिक प्रकरण विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। इन मामलों के प्रभावी और त्वरित निस्तारण के लिए आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह लीगल टीम के साथ मामलों की व्यक्तिगत समीक्षा कर रहे हैं।
आयोग के अनुसार, अध्यक्ष को भारतीय सेना की 51 सब एरिया, गुवाहाटी की विधि शाखा में कार्य करने का अनुभव रहा है। आयोग का कहना है कि इस विधिक अनुभव और रणनीतिक मार्गदर्शन से न्यायालयों में मामलों की प्रभावी पैरवी को मजबूती मिल रही है।






