जयपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
श्रीगंगानगर जिले की सुरतगढ़ तहसील के कालूसर गांव में एक ही जमीन पर कई फसल बीमा पॉलिसियां बनाकर करीब 30 लाख रुपए का बीमा क्लेम लेने का मामला विभागीय जांच में सामने आया है।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ई-मित्र संचालकों और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
एक ही जमीन पर 7 गुना ज्यादा क्षेत्र का बीमा
जांच में फर्जीवाड़े का तरीका सामने आने के बाद कृषि विभाग भी हैरान है।
विभाग के अनुसार, खसरा नंबर 281/91 की कुल 10.37 हेक्टेयर जमीन पर अलग-अलग लोगों के नाम से कई फसल बीमा पॉलिसियां कराई गईं।
एक ही जमीन के वास्तविक क्षेत्रफल से करीब 7 गुना अधिक क्षेत्र में बीमा करवाया गया।
विभाग का मानना है कि इस तरह का फर्जीवाड़ा सीएससी (ई-मित्र), बीमा कंपनी और संबंधित किसानों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
बनवारी लाल ने तीन पॉलिसियों से लिया 23.35 लाख का क्लेम
जांच के मुताबिक बनवारी लाल ने अपने खसरा नंबर 281/91 पर ऋणी किसान के रूप में 10.37 हेक्टेयर में मूंगफली की फसल का बीमा कराया।
इसी जमीन पर सीएससी (ई-मित्र) संचालक विकास कुमार के माध्यम से भी 10.37 हेक्टेयर और बिजेश के माध्यम से 10.3 हेक्टेयर में मूंगफली का बीमा कराया गया।
इन तीनों फसल बीमा पॉलिसियों से बनवारी लाल ने कुल 23,35,319 रुपए का क्लेम प्राप्त किया।
बटाईदार ने भी उसी जमीन पर कराया बीमा
बनवारी लाल ने इसी जमीन को रिछपाल पुत्र गिरधारी को बटाई/लीज पर दिया था।
इसके बाद रिछपाल ने भी उसी 10.37 हेक्टेयर जमीन पर बटाईदार किसान के रूप में मूंगफली की फसल का बीमा कराया।
रिछपाल को इस पॉलिसी के आधार पर 7,80,195 रुपए का फसल बीमा क्लेम प्राप्त हुआ।
तीन अन्य किसानों की पॉलिसियां भी सामने आईं
जांच में इसी खसरे की जमीन पर इमीचंद पुत्र महावीर, प्रमीला पत्नी सुनील साहरण और ओमप्रकाश पुत्र राजाराम के नाम से भी मूंगफली की फसल का बीमा कराया जाना सामने आया।
हालांकि इन तीनों मामलों में बीमा कंपनी ने पॉलिसियां रिजेक्ट कर दी थीं।
विभागीय जांच में इस पूरे मामले में बीमा कंपनी की संभावित संलिप्तता की भी बात सामने आई है।
कृषि मंत्री बोले- वास्तविक किसानों को ही मिलेगा लाभ
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि फर्जी पॉलिसी बनाने में शामिल बीमा कंपनी, सीएससी संचालक, सहयोगी किसान, सक्रिय दलाल, बीमा कंपनी के कर्मचारी और वित्तीय संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।
‘ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा’ जारी
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि कृषि विभाग ने फर्जीवाड़े के खिलाफ ‘ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा’ शुरू किया है।
इस बार फसल बीमा पॉलिसी के साथ फार्मर आईडी अनिवार्य की गई है। इससे फर्जीवाड़ा करने वालों की पहचान करना आसान होगा।
विभाग ऐसे सभी मामलों की गहन जांच करेगा, जिनमें कृषि लोन नहीं लेने वाले किसानों ने फसल बीमा कराया है।
टोंक और जयपुर में भी दर्ज हुई FIR
कृषि विभाग ने इससे पहले टोंक जिले की मालपुरा तहसील और जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील में खरीफ 2026 के लिए फर्जी फसल बीमा कराने वाले ई-मित्र संचालकों और अन्य दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी।
अब श्रीगंगानगर के कालूसर का मामला सामने आने के बाद कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया है।
फर्जी पॉलिसी रद्द कराने का अंतिम मौका
कृषि आयुक्त ने सीएससी (ई-मित्र) संचालकों, किसानों, ब्रोकर, बीमा कर्मचारियों और वित्तीय संस्थाओं को चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने फर्जी तरीके से फसल बीमा पॉलिसियां बनवाई हैं, वे उन्हें तत्काल निरस्त करा लें।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि इसके बाद फर्जीवाड़ा सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ईमानदार किसानों के हितों की रक्षा पर जोर
कृषि विभाग का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ वास्तविक और पात्र किसानों तक पहुंचाना उसकी प्राथमिकता है।
फर्जी पॉलिसी और गलत तरीके से क्लेम लेने वालों के खिलाफ जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
‘ऑपरेशन क्लीन फसल बीमा’ के तहत कृषि विभाग ने साफ कर दिया है कि योजना में फर्जीवाड़ा करने वालों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।






