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Piramal Empire का रहस्य: राजस्थान की मिट्टी से निकला भारत का ग्लोबल बिज़नेस टाइकून

Rajasthan News (राजस्थान समाचार) : Piramal Empire का रहस्य: राजस्थान की मिट्टी से निकला भारत का ग्लोबल बिज़नेस टाइकून

राजस्थान की शेखावाटी क्षेत्र की रेतीली ज़मीन से निकलकर अगर किसी मारवाड़ी परिवार ने भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के बिज़नेस मैप पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है, तो वह है पीरामल खानदान। Piramal Group की कहानी सिर्फ एक बिज़नेस सक्सेस स्टोरी नहीं, बल्कि परंपरा, दूरदृष्टि और सही समय पर लिए गए फैसलों की मिसाल है।

माखरिया से शुरुआत: पहचान की जड़ें

मारवाड़ी समाज में यह परंपरा रही है कि जब कोई व्यापारी अपने मूल गांव से बाहर व्यापार के लिए जाता था, तो उसकी पहचान उसके गांव के नाम से जुड़ जाती थी। पीरामल परिवार का मूल स्थान ‘माखर’ (झुंझुनू ज़िले के पास) माना जाता है। यही वजह है कि इस परिवार को सामाजिक और व्यापारिक हलकों में माखरिया कहा गया।

19वीं सदी के शुरुआत में यह परिवार राजस्थान के बगड़ कस्बे में आकर बस गया-जो आज भी पीरामल परिवार का पुश्तैनी और भावनात्मक केंद्र माना जाता है।

मखारिया से पीरामल तक: एक नाम, एक ब्रांड

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि माखरिया और पीरामल में क्या संबंध है?

इस सवाल का जवाब छुपा है सेठ पीरामल चतुर्भुज माखरिया  के जीवन में-जिन्होंने इस साम्राज्य की नींव रखी।

मुंबई के शुरुआती औद्योगिक दौर में सेठ पीरामल चतुर्भुज माखरिया ने अपनी ईमानदारी और व्यावसायिक समझ से अलग पहचान बनाई। जैसे-जैसे व्यापार बढ़ा, परिवार ने अपने गांव-आधारित नाम के बजाय अपने यशस्वी पूर्वज ‘पीरामल’ को ही स्थायी पहचान बना लिया।

 

Piramal Group History: टेक्सटाइल से फार्मा तक

पीरामल समूह का सफर तीन बड़े चरणों में समझा जा सकता है:

  1. टेक्सटाइल युग (1920-1970) – सेठ पीरामल और उनके उत्तराधिकारियों ने मुंबई में टेक्सटाइल मिलों के ज़रिए कारोबार खड़ा किया। मोरारजी मिल्स जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी ने उन्हें बड़े उद्योगपतियों की कतार में ला खड़ा किया।
  2. फार्मा क्रांति (1980-2010) – जब भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री संकट में थी, तब अजय पीरामल ने ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने कपड़ा उद्योग से बाहर निकलकर फार्मास्युटिकल सेक्टर में निवेश किया और Nicholas Piramal को देश की टॉप फार्मा कंपनियों में बदल दिया।
  3. डायवर्सिफिकेशन का दौर (2010-वर्तमान) – Abbott को जेनेरिक बिज़नेस बेचने के बाद Piramal Group ने
    • रियल एस्टेट
    • फाइनेंशियल सर्विसेज
    • हेल्थकेयर एनालिटिक्स

जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर्स में कदम रखा। आज यह समूह भारत के सबसे मजबूत डायवर्सिफाइड बिज़नेस एम्पायर्स में गिना जाता है।

संकट के समय पीरामल परिवार ने क्या अलग किया?

हर बड़े बिज़नेस साम्राज्य की असली परीक्षा बदलाव के दौर में होती है। पीरामल परिवार ने तीन बातें हमेशा प्राथमिकता में रखीं:

  • जड़ों से जुड़ाव: नाम बदला, शहर बदला-लेकिन बगड़ नहीं छोड़ा। स्कूल, कॉलेज और अस्पताल बनवाकर सामाजिक साख को और मजबूत किया।

  • औद्योगिक सोच: 1930-40 के दशक में ब्रिटिश कंपनियों के जाने के बाद पीरामल परिवार ने कई मिलों का अधिग्रहण कर खुद को ट्रेडर से इंडस्ट्रियलिस्ट में बदला।

  • अनुकूलनशीलता: भावनाओं में बहने के बजाय भविष्य को देखा और समय रहते डूबते बिज़नेस से बाहर निकलकर उभरते सेक्टर में निवेश किया।

Piramal Family से जुड़े रोचक तथ्य

  • Ambani Connection: ईशा अंबानी और आनंद पीरामल का विवाह भारत के दो सबसे बड़े बिज़नेस घरानों का संगम है।

  • कला और संस्कृति: मुंबई का Piramal Museum of Art उनकी सांस्कृतिक सोच को दर्शाता है।

  • शिक्षा में योगदान: बगड़ का पीरामल स्कूल आज भी शेखावाटी क्षेत्र का प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान है।

क्यों Piramal Empire भारत के टॉप बिज़नेस टायकून में गिना जाता है?

क्योंकि यह कहानी सिर्फ पैसा कमाने की नहीं है – यह कहानी है परंपरा और प्रगति के संतुलनसाहसिक फैसलों, और लंबी सोच वाले नेतृत्व की।

Piramal Empire इस बात का उदाहरण है कि अगर जड़ें मजबूत हों, तो दुनिया की कोई भी ऊंचाई दूर नहीं।