खाटूश्यामजी। नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव एक बार फिर चर्चा में है। मतदान के दौरान अनुपस्थित हुई वार्ड 10 की कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी अब दस्तयाब हो चुकी हैं।
लक्ष्मी देवी के मतदान केंद्र पर नहीं पहुंचने के बाद उनके पति हरलाल ने पुलिस को लिखित रिपोर्ट देकर कांग्रेस नेता श्याम सुंदर पूनिया पर उनकी पत्नी के अपहरण का आरोप लगाया था। यह आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाया गया है, इसकी पुष्टि पुलिस जांच से होना बाकी है।
पार्षद के लापता होने की सूचना के बाद नगरपालिका परिसर में भाजपा और कांग्रेस समर्थक आमने-सामने आ गए थे। दोनों पक्षों की ओर से विरोध और नारेबाजी हुई थी।
एक वोट को लेकर बना पूरा विवाद
खाटूश्यामजी नगर पालिका में भाजपा और कांग्रेस के पास 8-8 पार्षद हैं। इसके अलावा 3 निर्दलीय और एक RLP पार्षद हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद के चुनाव में प्रत्येक पार्षद का वोट महत्वपूर्ण है।
लक्ष्मी देवी भाजपा प्रत्याशी प्रेम देवी की रिश्तेदार बताई जा रही हैं। इसी वजह से उनके वोट को लेकर दोनों पक्षों की नजर बनी हुई थी।
भाजपा ने मतदान कराने की मांग की
लक्ष्मी देवी के मतदान केंद्र पर नहीं पहुंचने के बाद भाजपा नेताओं और समर्थकों ने उनका वोट करवाने की मांग को लेकर धरना दिया। भाजपा की ओर से कहा गया कि पार्षद को मतदान का अवसर मिलना चाहिए।
दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से अब तक हुए मतदान के आधार पर परिणाम घोषित करने की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस की ओर से मामले में कोर्ट जाने की तैयारी की बात भी कही गई है।
मतदान का समय बढ़ा, फिर चुनाव स्थगित
लक्ष्मी देवी के नहीं पहुंचने के कारण मतदान का समय कई बार बढ़ाया गया। देर रात तक प्रक्रिया चलने के बाद भी मतदान पूरा नहीं हो सका। इसके बाद मतपत्रों और चुनाव रिकॉर्ड को सुरक्षित करते हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया गया।
रिटर्निंग अधिकारी कपिल उपाध्याय ने राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बाद चुनाव स्थगित किए जाने की जानकारी दी थी।
अब क्या होगा?
लक्ष्मी देवी के दस्तयाब होने के बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर नया सवाल खड़ा हो गया है। अब राज्य निर्वाचन आयोग को यह तय करना है कि उन्हें नए मतदान में वोट डालने का अवसर दिया जाएगा या पहले की प्रक्रिया के आधार पर कोई निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल खाटूश्यामजी नगर पालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव स्थगित है और आगे की प्रक्रिया आयोग के निर्देश के बाद ही स्पष्ट होगी।






