सीकर। राजस्थान के सीकर जिले के श्रीमाधोपुर तहसील के झाड़ली गांव की बेटी पूनम कंवर ने अपनी मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प से एक बार फिर प्रदेश का नाम रोशन किया है। भारतीय रेलवे के रेलवे प्रोटेक्शन स्पेशल फोर्स (RPSF) में कार्यरत पूनम कंवर ने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया। उन्होंने भारतीय समयानुसार सुबह करीब 11:45 बजे 5,642 मीटर (18,510 फीट) ऊंचे शिखर पर पहुंचकर यह उपलब्धि हासिल की। शिखर पर उन्होंने तिरंगे के साथ RPF का विभागीय ध्वज भी फहराया।
11 दिन के अभियान के बाद हासिल की ऐतिहासिक सफलता
माउंट एल्ब्रुस अभियान के लिए पूनम कंवर 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित RPF मुख्यालय से रवाना हुई थीं। रूस की काकेशस पर्वत श्रृंखला में स्थित इस चोटी तक पहुंचना आसान नहीं था। ऊंचाई, कम ऑक्सीजन और चुनौतीपूर्ण पर्वतीय परिस्थितियों के बीच उन्होंने करीब 11 दिन के अभियान के बाद अपने लक्ष्य को हासिल किया।
माउंट एल्ब्रुस को दुनिया के Seven Summits में शामिल किया जाता है। इसके फतह के साथ पूनम कंवर ने सात महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों में से तीन महाद्वीपों की चोटियां अपने नाम कर ली हैं।
तीन महाद्वीपों की चोटियों पर फहराया तिरंगा
पूनम कंवर की पर्वतारोहण यात्रा लगातार सफलता की ओर बढ़ रही है।
2024 में अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलीमंजारो पर उन्होंने तिरंगा फहराया। इसकी ऊंचाई करीब 5,895 मीटर (19,341 फीट) है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने 27 नवंबर 2024 को किलीमंजारो के उहुरू पीक पर सफल चढ़ाई की थी और उन्हें रेलवे सुरक्षा बल से जुड़ी पहली महिला के रूप में इस उपलब्धि का रिकॉर्ड भी दर्ज किया गया है।
इसके बाद 2025 में ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च चोटी माउंट कोजियस्को पर सफलता हासिल की। इसकी ऊंचाई लगभग 2,228 मीटर (7,310 फीट) है।
अब 2026 में यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस फतह कर उन्होंने अपनी उपलब्धियों में तीसरे महाद्वीप की सर्वोच्च चोटी जोड़ ली है।
अब लक्ष्य Seven Summits, सपना माउंट एवरेस्ट
माउंट एल्ब्रुस की सफलता के बाद पूनम कंवर का लक्ष्य अब दुनिया के सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह करना है। उनका सबसे बड़ा सपना दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना है।
तीन महाद्वीपों की चोटियों पर सफलता हासिल कर चुकी पूनम की यह यात्रा बताती है कि लक्ष्य बड़ा हो तो लगातार तैयारी और आत्मविश्वास के साथ मुश्किल रास्तों को भी पार किया जा सकता है।
बचपन से था खेल और NCC का जुनून
पूनम कंवर के पिता रतन सिंह शेखावत सेवानिवृत्त फौजी हैं। पिता के अनुसार, पूनम को बचपन से ही खेलकूद और NCC गतिविधियों में विशेष रुचि थी। अनुशासन और देशसेवा का माहौल उन्हें परिवार से मिला, जिसे उन्होंने आगे अपने जीवन का हिस्सा बनाया।
वर्ष 2014 में उन्होंने रेलवे सुरक्षा विशेष बल (RPSF) में भर्ती होकर अपनी सेवा यात्रा शुरू की। नौकरी के साथ उन्होंने अपनी फिटनेस, खेल और एडवेंचर ट्रेनिंग को जारी रखा। उन्होंने कमांडो ट्रेनिंग के साथ तीरंदाजी और घुड़सवारी का प्रशिक्षण भी लिया। पर्वतारोहण की तैयारी के लिए उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की कई पर्वत चोटियों पर अभ्यास किया और पर्वतारोहण से संबंधित प्रशिक्षण एवं प्रमाण-पत्र हासिल किए।
वर्तमान में जयपुर में RPSF में तैनात
मौजूदा जानकारी के अनुसार पूनम कंवर 16वीं वाहिनी RPSF, जयपुर में तैनात हैं। ड्यूटी के साथ पर्वतारोहण जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में लगातार उपलब्धियां हासिल करना उनके अनुशासन और शारीरिक-मानसिक तैयारी को दर्शाता है।
राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को मानती हैं अपना आदर्श
पूनम कंवर ओलंपिक पदक विजेता कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को अपना आदर्श मानती हैं। सैन्य पृष्ठभूमि और खेल के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों से पूनम प्रेरणा लेती हैं।
गांव की बेटी से अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही तक का सफर
झाड़ली जैसे गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण के मंच तक पहुंचना पूनम कंवर की कहानी को खास बनाता है। एक ओर वह RPSF जैसी जिम्मेदार सुरक्षा सेवा में अपनी ड्यूटी निभा रही हैं, वहीं दूसरी ओर दुनिया की कठिन पर्वत चोटियों पर भारत का तिरंगा लेकर पहुंच रही हैं।
उनकी उपलब्धि सिर्फ एक पर्वत की चढ़ाई नहीं, बल्कि उन हजारों बेटियों के लिए संदेश है जो बड़े सपने देखती हैं लेकिन संसाधनों या परिस्थितियों की सीमाओं से डर जाती हैं। पूनम की यात्रा बताती है कि साहस, अनुशासन, प्रशिक्षण और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता से असंभव दिखने वाली मंजिल भी हासिल की जा सकती है।
झाड़ली से उठी यह बेटी अब एवरेस्ट की ओर
माउंट किलीमंजारो, माउंट कोजियस्को और माउंट एल्ब्रुस—तीन महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर तिरंगा फहरा चुकी पूनम कंवर की नजर अब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर है। अगर वह अपने इस लक्ष्य को भी हासिल करती हैं तो झाड़ली गांव से शुरू हुई उनकी प्रेरणादायक यात्रा एक और ऐतिहासिक अध्याय लिखेगी।
सीकर की धरती की इस बेटी की सफलता पर पूरे राजस्थान को गर्व है। पूनम कंवर की कहानी आज की बेटियों के लिए यही संदेश देती है – मंजिल कितनी भी ऊंची क्यों न हो, हौसले बुलंद हों तो शिखर तक पहुंचा जा सकता है।






