सीकर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय में कुलगुरु पद पर बड़ा बदलाव हुआ है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार राय का इस्तीफा राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने स्वीकार कर लिया है।

प्रो. राय को उत्तर प्रदेश के महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली का कुलपति नियुक्त किया गया है। वे जल्द ही बरेली पहुंचकर नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

प्रो. निष्ठा जसवाल ने संभाला अतिरिक्त कार्यभार

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. निष्ठा जसवाल को शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलगुरु का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है।

प्रो. निष्ठा जसवाल ने रविवार को निवर्तमान कुलगुरु प्रो. अनिल राय से कुलगुरु पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया। वे हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, शिमला की कुलपति भी रह चुकी हैं।

तीन साल के लिए बरेली विश्वविद्यालय की कमान

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने प्रो. अनिल राय को महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति पद पर तीन वर्ष के लिए नियुक्त किया है।

प्रो. राय के शेखावाटी विश्वविद्यालय से विदाई के साथ ही उनके कार्यकाल में हुए शैक्षणिक और प्रशासनिक नवाचार भी चर्चा में हैं।

नवाचार और डिजिटल सुधार के लिए याद रहेगा कार्यकाल

प्रो. अनिल राय के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध केंद्र और भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र की स्थापना हुई।

विद्यार्थियों को आधुनिक मीडिया शिक्षा देने के लिए हाईटेक मीडिया लैब और रेडियो शेखावाटी 91.2 एफएम कम्युनिटी रेडियो शुरू किया गया।

परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑटोमेटेड प्रश्नपत्र निर्माण प्रणाली लागू की गई। इसके साथ ही ऑनलाइन प्रोविजनल डिग्री, माइग्रेशन और डिजिटल छात्र सेवाएं शुरू की गईं।

विश्वविद्यालय ने अपने प्रमाणपत्रों और आधिकारिक दस्तावेजों पर ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ लिखने का निर्णय भी लिया।

छात्र सुविधाओं पर भी रहा जोर

प्रो. राय के कार्यकाल में छात्र हितों को प्राथमिकता देते हुए छात्रावास, स्वास्थ्य केंद्र, अतिथि गृह और आधुनिक विद्यार्थी कैंटीन का निर्माण कराया गया।

विश्वविद्यालय परिसर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा और ज्ञान उद्यान का लोकार्पण भी उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।

रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को मिली गति

नई शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालय में साइबर सिक्योरिटी एंड लॉ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, डिजिटल फोरेंसिक, फॉरेंसिक साइंस, बीबीए, बीसीए और पत्रकारिता एवं जनसंचार जैसे पाठ्यक्रम शुरू किए गए।

उद्योगों और संस्थानों के साथ एमओयू, कौशल विकास कार्यक्रम, शोध गतिविधियों और डिजिटल शिक्षा को भी गति मिली।

जनसंचार के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् हैं प्रो. राय

प्रो. अनिल राय महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में जनसंचार के वरिष्ठ प्रोफेसर रहे हैं। इससे पहले वे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी में कार्यकारी कुलपति और प्रतिकुलपति की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

वे वर्धा विश्वविद्यालय में संकायाध्यक्ष, छात्र कल्याण अधिष्ठाता, निदेशक और विभागाध्यक्ष जैसे पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं।

21 पुस्तकों के लेखक, दो विषयों में पीएचडी

प्रो. अनिल राय ने दो विषयों में परास्नातक और दो विषयों में पीएचडी की है। वे 21 पुस्तकों के लेखक, संपादक एवं संचयक रहे हैं और कई शोधपत्र प्रस्तुत कर चुके हैं।

उन्होंने दूरदर्शन और निजी समाचार चैनलों में पत्रकार, कार्यक्रम निर्माता और एंकर के रूप में भी काम किया है। उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय की प्रथम कोर्ट का सदस्य भी मनोनीत किया था।

कई राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित

उच्च शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रो. अनिल राय को वाइस चांसलर ऑफ द ईयर अवार्ड, भारत ज्योति पुरस्कार, संचार श्री पुरस्कार, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान, विदर्भ भूषण पुरस्कार और द्वारिकाधीश मानद उपाधि सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।

अब बरेली विश्वविद्यालय की नई जिम्मेदारी के साथ प्रो. अनिल राय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अनुभव का नया अध्याय शुरू होगा।

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