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राजस्थान में रींगस-सीकर रेलखंड का दोहरीकरण, माल ढुलाई में बढ़ोतरी

Reengas to Sikar railway doubling project in Rajasthan

रींगस-सीकर रेलखंड दोहरीकरण से माल ढुलाई और यात्री सुविधा में सुधार
सीकर, भारतीय रेलवे ने उत्तर पश्चिम रेलवे के तहत राजस्थान में रींगस-सीकर रेलखंड के दोहरीकरण को मंजूरी दी है।

इस 50.06 किलोमीटर लंबे रेलखंड में दोहरीकरण से वर्तमान क्षमता में सुधार होगा और प्रतिदिन दोनों दिशाओं में पांच अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन संभव होगा। इसके साथ ही माल ढुलाई में 2.36 मीट्रिक टन वार्षिक वृद्धि होगी।

परियोजना का महत्व

  • रेल परिचालन में गति और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
  • खाटू श्यामजी (सीकर) और सालासर बालाजी (चूरू) जैसे तीर्थस्थलों तक पहुँच आसान होगी।
  • वर्तमान में 77% क्षमता उपयोग हो रही है, जो 2029-30 तक बढ़कर 210% होने की संभावना है।
  • यात्री और माल ढुलाई में विलंब कम होगा, जिससे समय पर रेल सेवा सुनिश्चित होगी।
  • क्षेत्रीय औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों में सुधार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

परियोजना लागत

  • कुल लागत: 470.34 करोड़ रुपये
  • लंबाई: 50.06 किलोमीटर

अन्य रेलवे परियोजनाओं से तुलना (संदर्भ हेतु)

  1. उत्तर प्रदेश: औड़िहार – वाराणसी नगर 31.36 किलोमीटर तीसरी लाइन (497.07 करोड़ रुपये)
    • माल ढुलाई क्षमता: 1.99 मीट्रिक टन वार्षिक वृद्धि
    • भीड़भाड़ कम होगी, समय सारिणी विश्वसनीय होगी
  2. मध्य प्रदेश: उज्जैन बाईपास लाइन 8.60 किलोमीटर (189.04 करोड़ रुपये)
    • ट्रेनों का रिवर्सल हटेगा
    • तीर्थयात्रियों के लिए संपर्क सुविधा बेहतर होगी

राजस्थान की रणनीतिक भूमिका

रींगस-सीकर रेलखंड दोहरीकरण से राजस्थान के औद्योगिक और तीर्थ क्षेत्रों का रेल संपर्क मजबूत होगा।
यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देगी और क्षेत्रीय माल परिवहन में स्थायी सुधार लाएगी।