राजस्थान के यूडीएच राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा है कि प्रदेश में नगर निकाय चुनाव पूर्व की प्रक्रिया के अनुसार ही कराए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में मेयर, सभापति और पालिकाध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया जाएगा।
वे गुरुवार को सीकर में नगर निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर आयोजित भाजपा की जिला स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे।
सीधे चुनाव के अनुभव का किया जिक्र
खर्रा ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में एक बार निकाय प्रमुखों का सीधा चुनाव कराया गया था, लेकिन उस दौरान कई स्थानों पर चेयरपर्सन और पार्षद अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा के चुने गए। उनके अनुसार इससे बोर्डों में पूरे कार्यकाल के दौरान खींचतान की स्थिति बनी रही और विकास कार्य प्रभावित हुए।
उन्होंने कहा कि इसी अनुभव को देखते हुए इस बार पूर्व की प्रक्रिया के अनुरूप पार्षदों के माध्यम से निकाय प्रमुखों का चुनाव होगा।
निकाय चुनाव में देरी पर सरकार का पक्ष
राज्यमंत्री ने निकाय और पंचायत चुनाव में देरी के सवाल पर कहा कि वर्ष 2021-22 में उच्चतम न्यायालय ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के राजनीतिक आरक्षण को लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने कहा कि उस समय की राज्य सरकार ने इस दिशा में आवश्यक कदम नहीं उठाए। इसके बाद वर्ष 2024 में भाजपा सरकार बनने पर राजनीतिक आरक्षण के लिए ओबीसी आयोग का गठन किया गया। आयोग को प्रशासन के सहयोग से अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी से जुड़े आंकड़े एकत्रित करने का कार्य सौंपा गया।






