श्रीमाधोपुर (सीकर)। शेखावाटी के श्रीमाधोपुर निवासी 16 वर्षीय छात्र अर्पित पारीक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और डिजिटल इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

कक्षा 11-12 के छात्र अर्पित ने पांच डिजिटल प्रोजेक्ट विकसित किए हैं। इन प्रोजेक्ट्स में विद्यार्थियों की पढ़ाई, मानसिक दबाव, शिक्षा व्यवस्था, वैज्ञानिक गणनाओं और मशीन लर्निंग जैसे अलग-अलग विषयों को तकनीक के माध्यम से समझने का प्रयास किया गया है।

इन प्रोजेक्ट्स की खास बात यह है कि अर्पित ने इन्हें केवल विचार या कॉन्सेप्ट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लाइव डेमो और कोड को ऑनलाइन सार्वजनिक किया है।

छात्रों के तनाव और पढ़ाई के बोझ को समझने की कोशिश ‘Brain 2.0’

अर्पित का सबसे चर्चित प्रोजेक्ट ‘Brain 2.0’ है। यह गणितीय बायेसियन मॉडल पर आधारित डिजिटल टूल है, जिसे विद्यार्थियों के मानसिक दबाव और पढ़ाई से जुड़े Cognitive Load को समझने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

अर्पित के अनुसार, बोर्ड परीक्षाओं के साथ JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई, नींद और तनाव के बीच संतुलन बनाने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए Brain 2.0 में विद्यार्थी अपनी नींद, पढ़ाई के घंटे और तनाव से संबंधित जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह टूल उपलब्ध आंकड़ों का गणितीय मॉडल के माध्यम से विश्लेषण कर अध्ययन की दिनचर्या और कार्य प्रबंधन से जुड़े सुझाव प्रस्तुत करता है।

अर्पित ने इस प्रोजेक्ट को विकसित करने के दौरान न्यूरोसाइंस और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से जुड़े शोध का भी अध्ययन किया। निर्णय लेने और सीखने की प्रक्रियाओं से संबंधित अध्ययनों ने उन्हें इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया।

‘विद्या यात्रा’ में शिक्षा व्यवस्था को समझने का प्रयास

अर्पित का दूसरा प्रोजेक्ट ‘विद्या यात्रा’ है। इसमें कक्षा 1 से 12 तक विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को समझने का प्रयास किया गया है।

प्रोजेक्ट में खास तौर पर कक्षा 11 में विषय चयन, सामाजिक अपेक्षाओं, करियर संबंधी दबाव और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रभाव को दर्शाया गया है।

अर्पित का फोकस इस बात को समझने पर है कि कई विद्यार्थी अपनी रुचि और क्षमताओं के बजाय सामाजिक दबाव और अंकों की दौड़ से प्रभावित होकर भविष्य से जुड़े निर्णय लेते हैं।

उनका उद्देश्य शिक्षा को केवल अंक और रैंक के नजरिए से देखने के बजाय रुचि, मानसिक संतुलन और व्यक्तिगत विकास के दृष्टिकोण से समझना है।

’33 कोटि’ में भारतीय ज्ञान परंपरा और मनोविज्ञान का मेल

तीसरा प्रोजेक्ट ’33 कोटि’ है। इसमें भारतीय वैदिक परंपरा और आधुनिक मनोविज्ञान को एक साथ समझने का रचनात्मक प्रयास किया गया है।

प्रोजेक्ट में वैदिक परंपरा में वर्णित 33 देव श्रेणियों को मानवीय व्यवहार, आंतरिक गुणों और मनोवैज्ञानिक पैटर्न के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।

अर्पित का यह प्रोजेक्ट पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विचारों के साथ जोड़कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल स्वरूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करता है।

‘RL Visualizer’ से समझाई Q-Learning

अर्पित का चौथा प्रोजेक्ट ‘RL Visualizer’ है। यह मशीन लर्निंग की महत्वपूर्ण तकनीक Reinforcement Learning और Q-Learning पर आधारित इंटरैक्टिव टूल है।

इसमें एक वर्चुअल AI एजेंट ग्रिड के भीतर अपने अनुभवों और गलतियों से सीखता है। वह बाधाओं से बचते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए रास्ता खोजता है।

इस प्रोजेक्ट के जरिए विद्यार्थी यह समझ सकते हैं कि मशीनें अनुभव, प्रतिक्रिया और लगातार सीखने की प्रक्रिया के माध्यम से निर्णय लेना कैसे सीखती हैं।

‘Smart Calculator’ से वैज्ञानिक गणनाएं आसान

अर्पित का पांचवां प्रोजेक्ट ‘Smart Calculator’ है। यह विद्यार्थियों की गणितीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया वैज्ञानिक कैलकुलेटर है।

इसमें सामान्य जोड़, घटाव, गुणा और भाग के अलावा त्रिकोणमिति, लॉगरिदम और अन्य वैज्ञानिक गणनाओं की सुविधा दी गई है।

कैलकुलेशन हिस्ट्री का फीचर भी इसमें शामिल है, जिससे विद्यार्थी अपनी पिछली गणनाओं को दोबारा देख सकते हैं।

छोटे शहरों के विद्यार्थियों को AI से जोड़ने का लक्ष्य

श्रीमाधोपुर जैसे छोटे शहर से आने वाले अर्पित पारीक का मानना है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर, महंगे संस्थान या विशेष संसाधनों तक सीमित नहीं है।

उनके अनुसार, सही दिशा, निरंतर मेहनत और तकनीक के जरिए छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी भी नए विचारों पर काम कर सकते हैं।

अपनी पहल ARPIK.AI और AZ Group के माध्यम से अर्पित तकनीकी शिक्षा और नवाचार को अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं।

वे चाहते हैं कि छोटे शहरों और ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थी भी AI, कोडिंग और रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ें और अपने प्रोजेक्ट्स को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करें।

पांच प्रोजेक्ट्स के जरिए कम उम्र में तकनीकी प्रयोग

महज 16 वर्ष की उम्र में पांच अलग-अलग डिजिटल प्रोजेक्ट्स पर काम करना अर्पित की तकनीक और शोध के प्रति रुचि को दिखाता है।

इन प्रोजेक्ट्स में शिक्षा, कॉग्निटिव लोड, भारतीय ज्ञान परंपरा, मशीन लर्निंग और वैज्ञानिक गणनाओं जैसे अलग-अलग विषयों को शामिल किया गया है।

अर्पित पारीक की प्रोफाइल

  • नाम: अर्पित पारीक
  • उम्र: 16 वर्ष
  • निवास: श्रीमाधोपुर, जिला सीकर, राजस्थान
  • क्षेत्र: AI, मशीन लर्निंग, कॉग्निटिव रिसर्च और डिजिटल इनोवेशन
  • प्रमुख प्रोजेक्ट: Brain 2.0, विद्या यात्रा, 33 कोटि, RL Visualizer और Smart Calculator
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