सीकर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शालिनी गोयल ने बताया कि प्राधिकरण के प्रभावी हस्तक्षेप और विधिक सहायता से एक बालिका का भविष्य बाल विवाह के बंधन से मुक्त हुआ है।
पारिवारिक न्यायालय, सीकर ने एक नाबालिग बालिका का वर्ष 2022 में हुआ बाल विवाह निरस्त (शून्य) घोषित किया। बालिका का विवाह बचपन में ही करा दिया गया था।
बालिग होने की उम्र के करीब पहुंचने पर जब उस पर गौना (मुकलावा) कर ससुराल जाने का दबाव बनाया जाने लगा, तो उसने बाल विवाह की शिकायत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सीकर में की।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने उपलब्ध कराई कानूनी सहायता
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष रूपा गुप्ता ने तत्काल संज्ञान लिया। इसके बाद बालिका को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई।
प्राधिकरण की ओर से नियुक्त पैनल अधिवक्ता पुरुषोत्तम कुमार शर्मा ने बालिका की ओर से पारिवारिक न्यायालय, सीकर में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत विवाह निरस्त करने का वाद प्रस्तुत किया।
दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष बालिका के नाबालिग होने से संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बाल विवाह को निरस्त करते हुए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 3(1) एवं 12(क) के तहत शून्यकरण की डिक्री पारित की।
बाल विवाह की स्थिति में यहां मिल सकती है मदद
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शालिनी गोयल ने कहा कि बाल विवाह सामाजिक कुरीति होने के साथ-साथ कानूनन अपराध भी है।
उन्होंने कहा कि जिले में किसी भी बालिका या बालक को बाल विवाह जैसी परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा हो तो बिना भय के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सीकर में शिकायत की जा सकती है।
इसके अलावा नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 पर भी कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण प्रत्येक पीड़ित को निःशुल्क विधिक सहायता और संरक्षण उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है।






