फतेहपुर में सभापति चुनाव के लिए सियासी गणित
फतेहपुर। नगर निकाय चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद अब सभापति पद को लेकर सियासी जोड़तोड़ शुरू होने की चर्चा है। 55 वार्डों वाली नगर परिषद में सभापति बनाने के लिए 28 पार्षदों का बहुमत जरूरी है।
चुनाव परिणाम के मुताबिक कांग्रेस के 21 पार्षद चुनकर आए हैं, जबकि भाजपा के 13 पार्षद हैं। ऐसे में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से 7 सीट दूर है।
वहीं बड़ी संख्या में निर्दलीय पार्षदों के जीतकर आने से सभापति चुनाव का गणित और दिलचस्प हो गया है। निर्दलीयों को अपने पक्ष में करने के लिए दोनों प्रमुख दलों की ओर से प्रयास किए जाने की चर्चा है।
निर्दलीयों पर टिकी निगाहें
सूत्रों के अनुसार, करीब 13 निर्दलीय पार्षद एक जगह बाड़ाबंदी में बताए जा रहे हैं। वहीं आठ अन्य निर्दलीय पार्षदों में से दो के भाजपा के संपर्क में होने और कुछ के कांग्रेस समर्थित होने की चर्चा है।
एक निर्दलीय पार्षद के निकिता रिणवा के संपर्क में होने की भी बात सामने आ रही है। हालांकि इन राजनीतिक समीकरणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
2016 के फॉर्मूले की फिर चर्चा
फतेहपुर में इस बार 2016 के नगर निकाय चुनाव के दौरान बने राजनीतिक समीकरणों की भी चर्चा हो रही है। सूत्रों के मुताबिक उस समय कांग्रेस के पास बहुमत नहीं था और अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए पार्षदों को साथ लाने की रणनीति अपनाई गई थी।
बताया जाता है कि उस समय कांग्रेस पार्षदों को साथ लाने में सफल रही थी, लेकिन बाद में कांग्रेस के तीन पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग कर दी थी। इसी पुराने घटनाक्रम के चलते इस बार भी सभापति चुनाव से पहले पार्षदों की लामबंदी को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
‘पार्षद लाओ, सभापति बनो’ फॉर्मूले की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस खेमे में सभापति पद के संभावित दावेदार के लिए कम से कम 10 पार्षदों को अपने साथ लाने की चर्चा है। इसी बीच निकिता रिणवा और उनके परिवार की ओर से मजबूत दावा किए जाने की बात भी सामने आ रही है।
हालांकि सभापति चुनाव में अभी समय बाकी है और इस दौरान राजनीतिक समीकरण कई बार बदल सकते हैं। निर्दलीय पार्षद किस खेमे के साथ जाते हैं, इसी पर बहुमत का पूरा गणित काफी हद तक निर्भर करेगा।
जनरल सीट होने से दावेदारी मजबूत
सभापति पद की सीट जनरल कैटेगरी के लिए आरक्षित होने के कारण सामान्य वर्ग के संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। इसी क्रम में उप सभापति निकिता रिणवा को मजबूत उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है।
फिलहाल किसी भी खेमे के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में बाड़ाबंदी, समर्थन जुटाने और पार्षदों को अपने पक्ष में करने की राजनीति फतेहपुर की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र बन सकती है।






