सीकर। पिपराली चौराहे के पास शनिवार दोपहर सेप्टिक टैंक की खुदाई के दौरान मिट्टी ढहने से 35 वर्षीय श्रमिक सिकंदर अली करीब 23 फीट गहरी कुई में दब गए। उन्हें निकालने के लिए SDRF, सिविल डिफेंस, पुलिस, नगर परिषद और साथी श्रमिकों ने करीब साढ़े 12 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। रात करीब 2 बजे उन्हें बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
हादसा आदर्श गर्ल्स हॉस्टल के लिए सेप्टिक टैंक की खुदाई के दौरान हुआ। लगातार मिट्टी धंसने और रेस्क्यू के लिए लगाए गए सीमेंट के फर्मों के डगमगाने से बचाव कार्य में लगातार बाधाएं आती रहीं।
23 फीट खुदाई के दौरान ढही मिट्टी
पुलिस के अनुसार, पिपराली चौराहे से पहले एक गली में आदर्श गर्ल्स हॉस्टल के लिए सेप्टिक टैंक की कुई की खुदाई चल रही थी। श्रमिक करीब 22 से 23 फीट तक खुदाई कर चुके थे।
इसी दौरान पास में बने पुराने सीवरेज टैंक की गीली मिट्टी ढह गई। वहां काम कर रहे सिकंदर अली (35) पुत्र नवाब अली, निवासी काजियों की गली, मोहल्ला इस्लामिया स्कूल, वार्ड 10, मिट्टी में दब गए।
उनके साथी श्रमिक अब्दुल वासिद, मोहम्मद रिजवान और मोहम्मद नाजिद ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
JCB से नहीं पहुंची मदद, फिर शुरू हुआ रेस्क्यू
हादसे की सूचना के बाद JCB की मदद से मिट्टी हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन श्रमिक तक सीधी पहुंच नहीं बन सकी। इसके बाद सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन मदन सिंह कुड़ी के नेतृत्व में अनुदेशक श्रवण बुरड़क सहित 30 सदस्यों की टीम ने करीब 2:30 बजे बचाव कार्य शुरू किया।
टीम ने सीमेंट के फर्मे लगाकर नीचे तक पहुंचने का रास्ता बनाया और लगातार मिट्टी निकालने का काम किया।
मिट्टी फिर धंसी, हॉस्टल से छात्राओं को हटाया
शाम करीब 4:30 बजे रेस्क्यू के दौरान हॉस्टल के आगे की मिट्टी भी धंसने लगी। नीचे लगाए गए सीमेंट के फर्मे भी डगमगाने लगे।
सुरक्षा को देखते हुए हॉस्टल के आगे के हिस्से में रह रही छात्राओं को वहां से हटाया गया। इसके बाद नगर परिषद से मिट्टी के कट्टे और अन्य संसाधन मंगवाकर बचाव कार्य दोबारा शुरू किया गया।
मिट्टी लगातार खिसकने के कारण बचाव दल को बेहद सावधानी से काम करना पड़ा।
जयपुर से शाम 5:30 बजे पहुंची SDRF टीम
जयपुर से SDRF की टीम शाम करीब 5:30 बजे मौके पर पहुंची। टीम ने हाइड्रा और पोकलेन मशीनों की मदद से करीब चार फीट चौड़े और 17 फीट लंबे लोहे के पाइप घटनास्थल के पास डालने शुरू किए।
पाइप के भीतर SDRF के भागीरथमल सहित दो जवान और सिविल डिफेंस के विनोद गोदारा खुदाई कर मिट्टी बाहर निकालते रहे। इसके बाद पाइप को धीरे-धीरे नीचे उतारकर श्रमिक तक पहुंचने का प्रयास किया गया।
करीब साढ़े 12 घंटे की मशक्कत के बाद रात 2 बजे सिकंदर अली को गड्ढे से बाहर निकाला गया। हालांकि, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
चार भाइयों और परिवार की नजरें रेस्क्यू पर टिकी रहीं
सिकंदर अली पांच भाइयों में सबसे छोटे थे और उनके तीन बच्चे हैं। हादसे की सूचना मिलते ही उनके चारों बड़े भाई, भतीजे और मोहल्ले के सैकड़ों लोग मौके पर पहुंच गए।
देर रात तक परिवार और आसपास के लोग उनके सुरक्षित बाहर निकलने की उम्मीद लगाए रहे। घटनास्थल पर चिकित्सा टीम, 108 एंबुलेंस, नगर परिषद, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारी भी तैनात रहे।
अधिकारी और विधायक भी मौके पर पहुंचे
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सीकर एसडीएम सुशील कुमार, उद्योग नगर थानाधिकारी राजेश कुमार और नगर परिषद का अमला मौके पर मौजूद रहा। सीकर विधायक राजेंद्र पारीक भी घटनास्थल पर पहुंचे।
घटना की सूचना के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा।
मामले में पुलिस हादसे के कारणों और निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर आगे की कार्रवाई कर रही है।






