सीकर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2026 की फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि 16 अगस्त 2026 है। इसे लेकर जिला कलेक्टर आशीष मोदी ने बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक कर बैंकों को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत फसल बीमा पॉलिसी क्रिएशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में कृषकों की शिकायतों के निस्तारण और खरीफ 2026 तथा रबी 2026-27 की फसल बीमा अधिसूचना के प्रावधानों पर भी चर्चा हुई।
खरीफ में पांच और रबी में सात फसलें अधिसूचित
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सीकर जिले में खरीफ 2026 के लिए बाजरा, मूंग, ग्वार, चावला और मूंगफली सहित पांच फसलों को अधिसूचित किया गया है। इनमें बाजरा सभी तहसीलों में अधिसूचित है।
रबी 2026-27 के लिए गेहूं, जौ, चना, सरसों, तारामीरा और इसबगोल सहित सात फसलों को अधिसूचित किया गया है। दोनों मौसमों के लिए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को बीमा कंपनी नियुक्त किया गया है।
कृषकों के लिए प्रीमियम दर खरीफ फसलों पर 2 प्रतिशत, रबी फसलों पर 1.5 प्रतिशत तथा वाणिज्यिक और उद्यानिकी फसलों पर 5 प्रतिशत निर्धारित है। शेष प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार द्वारा समान अनुपात में वहन किया जाएगा।
16 अगस्त तक बीमा, 14 अगस्त तक फसल परिवर्तन
बैठक में बताया गया कि फसली ऋण लेने वाले ऋणी किसान 14 अगस्त 2026 तक फसल परिवर्तन करवा सकते हैं। इनमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, वाणिज्यिक बैंक, भूमि विकास बैंक और सहकारी बैंक से ऋण लेने वाले किसान शामिल हैं।
फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 16 अगस्त 2026 निर्धारित है। गैर-ऋणी और बटाईदार किसान जमाबंदी, एग्रीस्टैक फार्मर आईडी, स्वयं प्रमाणित घोषणा पत्र और बैंक खाते के विवरण के आधार पर ई-मित्र या डाकघर के माध्यम से पॉलिसी बनवा सकते हैं।
योजना में शामिल होने के लिए फार्मर आईडी/एग्रीस्टैक आईडी आवश्यक है। जिन किसानों की आईडी नहीं बनी है, वे आधार कार्ड, भूमि दस्तावेज और चालू मोबाइल नंबर के जरिए ई-मित्र या संबंधित पटवारी से आईडी बनवा सकते हैं।
बैंकों को शत-प्रतिशत पॉलिसी क्रिएशन के निर्देश
जिला कलेक्टर आशीष मोदी ने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है, उनसे व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें प्रक्रिया की जानकारी दी जाए और जल्द आईडी बनवाकर फसल बीमा पॉलिसी क्रिएट कराई जाए।
उन्होंने 16 अगस्त तक निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत पॉलिसी क्रिएशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रीमियम राशि बीमा कंपनी को NEFT/RTGS के माध्यम से समय पर हस्तांतरित कर प्रमाण-पत्र उच्च स्तर पर भेजने को कहा।
जरूरत पड़ने पर 15 और 16 अगस्त को बैंक शाखाएं खुली रखकर काम पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।
फसल नुकसान की सूचना समय पर देना जरूरी
बैठक में फसल नुकसान और क्लेम निर्धारण की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। किसानों को फसल नुकसान की सूचना 14447 हेल्पलाइन, कृषि रक्षक पोर्टल और Crop Insurance App के माध्यम से निर्धारित समय में दर्ज कराने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए।
बताया गया कि शिकायत मिलने के 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सर्वेयर नियुक्त करना आवश्यक है। निर्धारित समय में सर्वेयर नियुक्त नहीं होने पर प्रति इकाई 20 हजार रुपये की पेनल्टी का प्रावधान है।
इसके बाद निर्धारित अवधि में तहसील कोऑर्डिनेटर, कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी और किसान की मौजूदगी में ऑनलाइन ऐप के माध्यम से सर्वे किया जाना है। निर्धारित समय में सर्वे नहीं होने पर प्रति इकाई एक हजार रुपये की पेनल्टी का प्रावधान बताया गया।
हर तहसील में पर्याप्त स्टाफ लगाने के निर्देश
जिला कलेक्टर ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के जिला प्रबंधक को किसानों की शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सीकर जिले में पोस्ट-हार्वेस्ट से जुड़ी शिकायतों की संख्या अधिक होने को देखते हुए प्रत्येक तहसील में आवश्यकता के अनुसार 4-5 तहसील कोऑर्डिनेटर उपलब्ध कराने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजने को कहा गया।
जिले में करीब 4500-4600 फसल कटाई प्रयोग आयोजित किए जाने हैं। जिला कलेक्टर ने इन्हें निर्धारित समय में शत-प्रतिशत पूरा कराने के निर्देश दिए।
योजना के प्रचार-प्रसार पर जोर
फसल बीमा की अंतिम तिथि से पहले किसानों तक योजना की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए एफएम रेडियो, समाचार पत्र, होर्डिंग, मोबाइल पॉप-अप, मैसेज और व्हाट्सऐप सहित विभिन्न माध्यमों का उपयोग करने को कहा गया।
जिला कलेक्टर ने राजस्थान संपर्क पोर्टल और 181 पर प्राप्त शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से किसानों से व्यक्तिगत संपर्क कर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने और उचित समाधान सुनिश्चित करने को कहा।






