सीकर, राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी पहल के तहत खंडेला ब्लॉक के ग्राम ज्ञानपुरा, पंचायत मलिकपुर की सुमन देवी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भूमिका निभा रही हैं।
सुमन देवी राजीविका में कलस्टर कॉर्डिनेटर के रूप में काम कर रही हैं। वह क्षेत्र की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों के साथ जोड़ने के साथ ही बचत, बैंकिंग, ऋण, सरकारी योजनाओं और आजीविका गतिविधियों की जानकारी देती हैं।
चुनौतियों से सीखकर बनाई नई राह
राजीविका से जुड़ने से पहले सुमन देवी के सामने भी पारिवारिक और आर्थिक चुनौतियां थीं। सीखने की इच्छा, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ उन्होंने राजीविका से जुड़कर अपने लिए नई दिशा बनाई।
कलस्टर कॉर्डिनेटर की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के साथ नियमित संपर्क और समन्वय शुरू किया। बैठकों के माध्यम से महिलाओं को समूह की गतिविधियों और उपलब्ध अवसरों के बारे में जानकारी दी।
महिलाओं का बढ़ाया आत्मविश्वास
शुरुआत में क्षेत्र की कई महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों की बैठकों में नियमित भागीदारी करने और नई आजीविका गतिविधियां अपनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
सुमन देवी ने नियमित संपर्क, बैठकों और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के माध्यम से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानने और समूह के माध्यम से मिल-जुलकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
बचत और बैंकिंग की समझ बढ़ी
सुमन देवी के प्रयासों से क्षेत्र की अनेक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं और बचत तथा आजीविका गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने लगीं।
इसके साथ ही महिलाओं में बैंकिंग संबंधी जानकारी, निर्णय लेने की क्षमता और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी को लेकर आत्मविश्वास बढ़ा। महिलाओं की ओर से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
सुमन देवी अपनी जिम्मेदारियों का लगन और निष्ठा के साथ निर्वहन कर रही हैं। उनके प्रयासों से वह क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बनी हुई हैं।
सुमन देवी का मानना है कि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, अवसर और सहयोग उपलब्ध कराया जाए तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।






