मधेपुर रेफरल अस्पताल में अस्पताल प्रबंधक के पद पर तैनात चिरंजीव कुमार चिराग के खिलाफ फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है।
आरोपित सियालाल प्रसाद के पुत्र चिरंजीव कुमार चिराग सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के मोरकाही गांव के निवासी बताए गए हैं।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजू कुमार रंजन ने 29 सितंबर को मधेपुर थानाध्यक्ष को पत्र भेजकर मामले की जानकारी दी।
प्रमाणपत्र जांच में फर्जी निकली MBA डिग्री
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, चिरंजीव कुमार चिराग ने MBA की डिग्री के आधार पर मधेपुर रेफरल अस्पताल में अस्पताल प्रबंधक के पद पर नौकरी हासिल की थी।
विभाग की ओर से उसके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। जांच के दौरान MBA की डिग्री फर्जी पाए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के आदेश और जिला स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर उसकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई।
मार्च 2023 में अस्पताल में किया था योगदान
जानकारी के अनुसार, चिरंजीव कुमार ने मार्च 2023 में मधेपुर रेफरल अस्पताल में योगदान दिया था। उसके प्रमाणपत्रों का सत्यापन अगस्त 2024 में कराया गया था।
फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद विभाग ने उसकी सेवा समाप्त कर दी थी। आरोप है कि सेवा समाप्ति के दिन ही वह अस्पताल से चला गया।
4.67 लाख रुपये सरकारी राशि लेने का आरोप
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, जांच में सामने आया कि चिरंजीव कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान वेतन और अन्य मदों में कुल 4,67,112 रुपये सरकारी खजाने से प्राप्त किए।
सेवा समाप्त होने के बाद विभाग ने उसे यह राशि सरकारी खाते में जमा कराने का निर्देश दिया।
अस्पताल प्रशासन की ओर से राशि वापस करने के लिए कई बार पत्र भेजे जाने के बावजूद अब तक एक रुपया भी जमा नहीं करने की बात कही गई है।
मधेपुर थाने में कांड संख्या 271/26 दर्ज
राशि की वसूली और कानूनी कार्रवाई के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने पुलिस से कार्रवाई का अनुरोध किया है।
अस्पताल प्रशासन के दूसरे पत्र के अनुसार, इस मामले में मधेपुर थाना में कांड संख्या 271/26 दर्ज किया जा चुका है।
अब पुलिस मामले की जांच के साथ सरकारी राशि की वसूली के लिए आगे की कार्रवाई करेगी।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी अस्पताल में नौकरी हासिल करने का मामला सामने आने के बाद नियुक्ति और प्रमाणपत्र सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
मामले में विभागीय स्तर पर प्रमाणपत्रों की जांच के बाद सेवा समाप्त की जा चुकी है। वहीं, पुलिस प्राथमिकी के बाद अब मामले की कानूनी जांच और सरकारी राशि की वसूली की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।






