वन विभाग की पांच सदस्यीय टीम सात दिन से कर रही थी निगरानी
चूरू जिले के बीदासर थाना क्षेत्र के दूंकर गांव में पिछले करीब 40 दिनों से ग्रामीणों के लिए डर का कारण बना लेपर्ड आखिरकार शुक्रवार सुबह पिंजरे में कैद हो गया। लेपर्ड के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
ग्रामीणों के अनुसार लेपर्ड पिछले कई दिनों से गांव और आसपास के खेतों में सक्रिय था। इस दौरान उसने कई बार नीलगाय, बकरियों और गायों को अपना शिकार बनाया। लगातार बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग की ओर से भी क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई थी।लेपर्ड की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ग्रामीणों ने गांव और खेतों में सीसीटीवी कैमरे लगाए थे।
वहीं वन विभाग की पांच सदस्यीय टीम भी पिछले सात दिनों से क्षेत्र में तैनात थी। टीम लगातार लेपर्ड की गतिविधियों पर नजर रख रही थी।वन विभाग के अधिकारियों ने लेपर्ड को पकड़ने के लिए दूंकर गांव के एक खेत में दो पिंजरे लगाए थे। इनमें से एक पिंजरे में बकरे का मांस रखा गया था, जबकि दूसरा पिंजरा खाली छोड़ा गया था।अधिकारियों के अनुसार देर रात लेपर्ड ने गांव में एक भेड़ का शिकार किया था। इसके बाद वह आसपास के खेत में घूम रहा था।
इसी दौरान तड़के वह वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया।वन विभाग की टीम शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे गश्त कर रही थी। इसी दौरान टीम ने पिंजरे में लेपर्ड को देखा। इसकी सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों को दी गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और बीदासर पुलिस मौके पर पहुंचे।क्षेत्रीय वन अधिकारी बाबूलाल ने लेपर्ड के पिंजरे में कैद होने की पुष्टि की।
सूचना मिलने पर क्षेत्रीय वन अधिकारी छापर उमेश बागोतिया, सहायक वनपाल महेंद्र सिंह, वन रक्षक राकेश बिश्नोई, देवीलाल, विकास और बनवारीलाल सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार लेपर्ड का रेस्क्यू करने के बाद उसे जयपुर स्थित वाइल्ड लाइफ सेंटर ले जाया जाएगा। वहीं, लेपर्ड के पकड़े जाने के बाद पिछले कई दिनों से उसके कारण चिंतित ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।






