संबंधित कर्मचारी दो दिन से कार्यालय से नदारद
झुंझुनूं उप वन संरक्षक (DFO) कार्यालय में विकास कार्यों से जुड़े टेंडरों की धरोहर राशि कैश में लेने का मामला सामने आया है।
आरोप है कि लाखों रुपए नकद लिए गए और राशि सरकारी खाते में जमा नहीं हुई। मामले में 3 लाख 37 हजार रुपए कैश लिए जाने और इसके बदले कार्यालय की GA-55 रसीद जारी किए जाने का दस्तावेज सामने आने की बात कही गई है।जानकारी के अनुसार फतेहपुर की शारदा इंटरप्राइजेज से 3 लाख 37 हजार रुपए नकद जमा करवाए गए।बताया गया है कि कार्यालय के स्टोर में कार्यरत कनिष्ठ लिपिक प्रहलाद ने यह राशि जमा ली। इसके बदले GA-55 रसीद जारी की गई।
संबंधित दस्तावेजों पर अधिकारी के हस्ताक्षर होने की बात भी सामने आई है।मामले में आशंका जताई जा रही है कि कार्यालय से दो दर्जन से अधिक GA-55 रसीदें जारी हुई हैं।यदि इन सभी रसीदों का मिलान कैश-बुक और बैंक रिकॉर्ड से किया जाता है तो कैश लेन-देन की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि जांच में 30 लाख रुपए से अधिक के लेन-देन का खुलासा हो सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।मामले में सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि 18 अगस्त को 3.37 लाख रुपए कैश लेने के बाद 25 अगस्त तक यह राशि सरकारी खाते में जमा क्यों नहीं हुई?इसके अलावा वित्त विभाग के वर्ष 2007 के परिपत्र के नियम 42 और 52(1) में कार्यालय स्तर पर 500 रुपए से अधिक नकद नहीं लेने से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
मामला सामने आने के बाद संबंधित कनिष्ठ लिपिक प्रहलाद के दो दिन से कार्यालय में नहीं आने की जानकारी सामने आई है।DFO कविया बी ने मामले की जांच ACF प्राची चौधरी को सौंप दी है।DFO कविया बी ने बताया कि संबंधित फर्म के ठेकेदार की ओर से कैश जमा किए जाने की शिकायत दी गई है।उन्होंने कहा कि रसीद कार्यालय से ही जारी हुई है। प्रथम दृष्टया इसे लापरवाही का मामला बताया गया है।
DFO के अनुसार, यदि जांच में गबन साबित होता है, तो संबंधित कार्मिक को 16 सीसी का नोटिस देने के साथ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल जांच का केंद्र GA-55 रसीद, कैश-बुक, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित टेंडरों की धरोहर राशि रहेगा।
इन दस्तावेजों के मिलान से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्यालय में कितनी राशि नकद ली गई, कितनी राशि सरकारी खाते में जमा हुई और किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई या नहीं। ब्यूरो रिपोर्ट झुंझुनू






