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Video News : झुंझुनूं में मंत्री के निर्देशों किसकी मनमानी भारी ?  बोर्ड हटाने में ‘चालाकी’ उजागर

दो साल तक टलते रहे निर्देश, मौके पर पहुंचते ही प्रभारी मंत्री को होना पड़ा सख्त
 
 
Jhunjhunu information center board controversy after minister inspection

झुंझुनूं, जिले में एक बार फिर प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े होने का मामला सामने आया हैं। राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत के निर्देशों के बावजूद सूचना केंद्र में लगे एक बोर्ड को करीब दो साल तक नहीं हटाया गया

 मामला कहां से शुरू हुआ

भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद, सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान सूचना केंद्र में लगे एक बोर्ड का मुद्दा उठा था।
उस समय प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत ने तत्कालीन जिला कलेक्टर और जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी (DPRO) को बोर्ड हटाने के निर्देश दिए थे।

 निर्देश दिए गए, लेकिन अमल नहीं

मंत्री के आदेश के बावजूद बोर्ड जस का तस बना रहा।
सरकार का दूसरा साल भी पूरा हो गया, लेकिन निर्देशों की पालना नहीं हुई। जब दो साल की उपलब्धियों को लेकर फिर से प्रेस वार्ता हुई, तो पत्रकार ने मंत्री से सीधा सवाल किया

“जब मंत्री के आदेश नहीं माने जाते, तो आम जनता की सुनवाई कैसे होती होगी?”

इस पर मंत्री ने कहा आज ही मौके पर चलकर आपके साथ वह बोर्ड देखूंगा और झुंझुनू जिला कलेक्टर को बोलकर आज ही उसे हटा दिया जाएगा।

 फोन पर भी दी गई सूचना

हमारे संवाददाता ने 3 जनवरी को मंत्री अविनाश गहलोत को फोन कर बताया कि अब तक आदेश की पालना नहीं हुई है।
मंत्री ने आश्वासन दिया कि वे तुरंत जिला कलेक्टर से बात करेंगे, लेकिन इसके बाद भी स्थिति नहीं बदली।

 ‘चालाकी’ आई सामने

12 जनवरी को जब मंत्री जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेने झुंझुनूं पहुंचे, तो बोर्ड हटाने की बजाय एक नई “चालाकी” सामने आई।
सूचना जनसंपर्क अधिकारी द्वारा शांति एवं अहिंसा विभाग के बोर्ड के आगे भजनलाल सरकार की योजना का छोटा बोर्ड लगा दिया गया, ताकि असली बोर्ड नजर न आए।

 जागरूक लोगों ने खोली पोल

जागरूक नागरिकों ने इस लीपा-पोती की सूचना हमारे संवाददाता को दी।
मौके की तस्वीरें मंत्री के व्हाट्सएप पर भेजी गईं, और फ़ोन पर उनको इस लीपा पोती भरी चालाकी से अवगत करवाया गया। जिसके बाद प्रभारी मंत्री ने तत्काल संज्ञान लिया और सूचना केंद्र में फोन खनखनाया । फोन के बाद सूचना केंद्र में हड़कंप मच गया।

 आनन-फानन में ढकने की कोशिश

मंत्री के फोन के बाद सूचना केंद्र में हड़कंप मच गया।
करीब पांच कर्मचारी—नरेश सैनी, संदीप वालिया, गोपाल और नवनियुक्त लिपिक—बोर्ड ढकने में जुट गए।

कर्मचारियों ने बताया कि

ऊपर से फोन आया है, अब यह बोर्ड दोबारा नहीं खुलेगा। समय दिया जाए, इसे हटाया जाएगा या सूचना केंद्र का नाम लिखा जाएगा।

 : सवाल तो ये भी…

  • जब शांति एवं अहिंसा विभाग की समितियां भंग हो चुकी हैं, तो बोर्ड की नई रंगाई-पुताई क्यों?

  • मंत्री के बार-बार निर्देशों के बावजूद इतनी ढिलाई क्यों?

  • मंत्री की नजर से बचाने के लिए छोटा बोर्ड लगाना क्या प्रशासनिक कुकृत्य नहीं?

  • क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?

 विपक्ष का हमला

फतेहपुर विधायक हाकम अली खान जब एक बार झुंझुनू सर्किट हाउस में पहुंचे थे तब पत्रकारों के सामने उनसे अनौपचारिक बात हुई थी तब उन्होंने बताया था कि सरकार ने एक आदेश से जिला स्तर की शांति समितियां को भंग कर दिया है लेकिन झुंझुनू जिले में भाजपा सरकार ने अहिंसा विभाग के इस बोर्ड की नए सिरे से रंगाई पुताई क्यों की है यह बात तो उनकी समझ से भी परे हैं। 

वहीं मंडावा विधायक व कांग्रेस जिलाध्यक्ष रीटा चौधरी ने कहा

एक तरफ गांधीजी का नाम योजनाओं से हटाया जा रहा है, दूसरी तरफ उन्हीं से जुड़े बोर्ड को बचाया जा रहा है। यह भाजपा का दोहरा चरित्र है।

 पत्रकारों की राय

झुंझुनूं के कुछ पत्रकारों का कहना है कि

  • मंत्री के निर्देशों की अनदेखी गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।

  • सूचना केंद्र DIPRO के कार्यक्षेत्र में आता है, फिर भी बोर्ड नहीं हटना मनमानी की ओर इशारा करता है।

  • इस मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि संदेश जाए कि अधिकारी सरकार से ऊपर नहीं हैं

  • शेखावाटी लाइव ब्यूरो रिपोर्ट झुंझुनू। Shekhawati Live ऐसे ही  सच, सवाल और सरोकार से आपको लगतार अवगत करवाता रहेगा। बेबाकी से जमीनी हकीकत से रूबरू होने के लिए जुड़े रहे शेखावाटी लाइव के साथ। लाइक करके और चैनल को सब्सक्राइब कर हमारा मनोबल बढ़ाना बिलकुल भी ना भूले।