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वेंटिलेटर पर रिश्ते : अकेलेपन की धूप में झुलसता बुढ़ापा, बुजुर्ग कोई ‘बोझ’ नहीं, बल्कि अनुभवों का अनमोल खजाना

संपादकीय लेख बदलते दौर में भारतीय समाज की संरचना जिस तेजी से बदली है, उसने हमारी कई पुरानी, मजबूत और संवेदनशील परंपराओं को झकझोर कर रख दिया है। संयुक्त परिवारों का बिखरना और एकल परिवारों का बढ़ता चलन अब केवल एक सामाजिक बदलाव नहीं, बल्कि हमारे बुजुर्गों के लिए एक मानसिक और सामाजिक त्रासदी बनता […]

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