हादसे के दौरान स्कॉर्पियो के एयरबैग नहीं खुलने के लगे आरोप
झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ क्षेत्र के कोलसिया गांव निवासी भारतीय सेना के जवान राकेश कुमार दूत (35) का बुधवार शाम सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। मंगलवार देर रात बगड़ तिराहा मोड़ पर हुए सड़क हादसे में उनका निधन हो गया था।
उनके छह वर्षीय बेटे नितेश ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।बुधवार शाम डूंडलोद फाटक से कोलसिया गांव तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान “भारत माता की जय” और “वीर जवान अमर रहें” के नारों से पूरा मार्ग गूंज उठा। बड़ी संख्या में लोगों ने पुष्प अर्पित कर जवान को श्रद्धांजलि दी।तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचने पर माहौल भावुक हो गया।
सेना के वाहन से पार्थिव शरीर घर लाया गया, जहां परिजनों ने नम आंखों से अंतिम दर्शन किए।गांव के मुक्तिधाम में भारतीय सेना के जवानों ने सैन्य परंपरा के अनुसार गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। विधायक विक्रम सिंह जाखल सहित सेना के अधिकारियों और अन्य लोगों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद छह वर्षीय बेटे नितेश ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया।राकेश कुमार दूत वर्ष 2011 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे।
वर्तमान में वे लेह-लद्दाख में एजुकेशन हवलदार के पद पर तैनात थे। वे 23 जुलाई को अवकाश पर अपने घर आए थे और 14 अगस्त तक परिवार के साथ रहने वाले थे।हालांकि मंगलवार देर रात बगड़ तिराहा मोड़ के पास उनकी स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराने के बाद पलट गई। हादसे में राकेश और उनके एक साथी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी दिल्ली की ओर जा रहे थे।राकेश के पिता शीशराम दूत भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। हादसे के बाद राकेश के भाई नेमीचंद ने आरोप लगाया था कि दुर्घटना के समय स्कॉर्पियो के एयरबैग नहीं खुले, जिससे हादसा और अधिक गंभीर हो गया। ब्यूरो रिपोर्ट झुंझुनू






