उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी की मुहीम के बीच 300 साल पुरानी फ्रेस्को हवेली तोड़ने का आरोप
आचार संहिता के बीच 300 साल पुरानी फ्रेस्को हवेली को ध्वस्त करने का आरोप, शिकायत के बाद उठे संरक्षण पर सवाल
झुंझुनूं। जिस शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियों को हाल ही में वैश्विक पहचान की दिशा में बड़ा कदम मिला है, उसी शेखावाटी के झुंझुनूं शहर से विरासत संरक्षण को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुराने शहर के चूना चौक के पास शीतला गली में स्थित सैकड़ों साल पुरानी, दुर्लभ फ्रेस्को पेंटिंग वाली एक ऐतिहासिक हवेली को कथित तौर पर JCB से ध्वस्त किए जाने का मामला सामने आया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब शेखावाटी की ऐतिहासिक हवेलियों को UNESCO की Tentative List में शामिल किए जाने के बाद राजस्थान की कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत को लेकर देश-दुनिया में चर्चा हो रही है। UNESCO के आधिकारिक दस्तावेज में The Painted Haveli Towns of Shekhawati के तहत झुंझुनूं समेत 14 ऐतिहासिक कस्बों को शामिल किया गया है। UNESCO ने शेखावाटी के इन नगरों को 18वीं से 20वीं सदी के बीच विकसित विशिष्ट व्यापारिक, स्थापत्य और कलात्मक परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण माना है।
एक तरफ UNESCO की सूची, दूसरी तरफ JCB का वार
शेखावाटी की पहचान उसकी हवेलियों, भित्तिचित्रों, झरोखों, नक्काशीदार दरवाजों और विशिष्ट स्थापत्य शैली से बनी है। UNESCO के अनुसार इन ऐतिहासिक नगरों में हवेलियां केवल अलग-अलग इमारतें नहीं हैं, बल्कि बाजारों, मंदिरों, जल संरचनाओं और पारंपरिक शहरी स्वरूप के साथ मिलकर एक विशिष्ट ऐतिहासिक परिदृश्य बनाती हैं।
ऐसे में झुंझुनूं के पुराने शहर में कथित तौर पर एक प्राचीन फ्रेस्को हवेली के ध्वस्तीकरण का मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय निवासी आशीष तुलस्यान की ओर से मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार, स्वायत्त शासन विभाग, जिला कलेक्टर और नगर परिषद आयुक्त को 7 सितंबर 2026 को शिकायत भेजे जाने की बात सामने आई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चूना चौक के पास शीतला गली में स्थित ऐतिहासिक हवेली को योजनाबद्ध तरीके से तोड़ा जा रहा है।
चुनावी व्यस्तता के बीच कार्रवाई का आरोप
मामले का एक और संवेदनशील पहलू यह है कि राजस्थान में निकाय चुनाव का दौर चल रहा है। राज्य में 309 नगरीय निकायों के चुनाव 9 और 11 सितंबर को होने हैं तथा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यस्तता का फायदा उठाकर कथित तौर पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
बिना अनुमति तोड़फोड़ का भी आरोप
शिकायत में प्रथम दृष्टया यह आरोप लगाया गया है कि हवेली को तोड़ने अथवा वहां निर्माण की कार्रवाई नगर परिषद की वैध स्वीकृति या नक्शा अनुमोदन के बिना की जा रही है।
शिकायतकर्ता ने स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित भूमिका अथवा लापरवाही की भी जांच की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मिट गई तो सिर्फ एक इमारत नहीं बचेगी
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यह हवेली वास्तव में ऐतिहासिक और फ्रेस्को कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, तो क्या इसके संरक्षण के लिए कोई तत्काल व्यवस्था मौजूद है?
शेखावाटी की हवेलियों को UNESCO की Tentative List में शामिल किए जाने का उद्देश्य ही क्षेत्र की असाधारण स्थापत्य और कलात्मक विरासत को संरक्षण और विश्व स्तर पर पहचान की दिशा में आगे बढ़ाना है। ऐसे में किसी ऐतिहासिक हवेली का बिना समुचित जांच और संरक्षण प्रक्रिया के ध्वस्त हो जाना इस पूरी विरासत नीति पर सवाल खड़ा कर सकता है।
शिकायतकर्ता ने रखी चार प्रमुख मांगें
शिकायत में प्रशासन से तत्काल चार कदम उठाने की मांग की गई है—
पहली, मौके पर चल रहे कथित अवैध विध्वंस और निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए।
दूसरी, हवेली का मौका-मुआयना कर उसकी ऐतिहासिक एवं स्थापत्य महत्ता का आकलन किया जाए और उसे हेरिटेज भवन के रूप में चिन्हित कर संरक्षण दिया जाए।
तीसरी, यदि जांच में अवैध विध्वंस या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो इसमें शामिल लोगों तथा जिम्मेदार अथवा लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और FIR दर्ज की जाए।
चौथी, झुंझुनूं शहर की अन्य ऐतिहासिक हवेलियों को बचाने के लिए ठोस संरक्षण नीति बनाई जाए।
बड़ा सवाल: UNESCO की सूची में नाम या जमीन पर संरक्षण?
शेखावाटी की हवेलियों का UNESCO की Tentative List में पहुंचना निश्चित रूप से राजस्थान के लिए गौरव की बात है। लेकिन अब असली परीक्षा कागज पर दर्ज इस वैश्विक पहचान की नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद विरासत को बचाने की है।
एक तरफ दुनिया शेखावाटी की फ्रेस्को हवेलियों को विश्व धरोहर की संभावनाओं के साथ देख रही है, दूसरी तरफ झुंझुनूं में कथित तौर पर JCB इन विरासतों को मिटाने में लगी है—तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर UNESCO तक पहुंची शेखावाटी की विरासत अपने ही शहर में कितनी सुरक्षित है?
फिलहाल शिकायत के आधार पर प्रशासन से जांच और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण की स्थिति, भवन की ऐतिहासिक महत्ता, निर्माण/तोड़फोड़ की अनुमति और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई करता है।






