देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली का अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि राजस्थान में 1 सितंबर को मौसम का मिजाज अपेक्षाकृत शांत रहने का अनुमान है।
पिछले दिनों बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने के बाद प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर बारिश देखने को मिल सकती है।
भरतपुर और उदयपुर संभाग में बारिश की संभावना
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 1 सितंबर को भरतपुर और उदयपुर संभागों में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है।
वहीं जयपुर, अजमेर और कोटा संभाग समेत पूर्वी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों के लिए कोई विशेष भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
पश्चिमी राजस्थान में भी मौसम के मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है।
राजस्थान में भारी बारिश का अलर्ट नहीं
राज्य में 1 सितंबर के लिए भारी या अति भारी बारिश का विशेष अलर्ट नहीं है। ऐसे में प्रदेश में व्यापक स्तर पर तेज बारिश का दौर रहने की संभावना कम है।
हालांकि स्थानीय मौसम परिस्थितियों के कारण कुछ क्षेत्रों में अचानक बारिश या गरज-चमक की गतिविधियां हो सकती हैं।
श्रीगंगानगर में 38.7 डिग्री तापमान
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में बीते समय में सबसे अधिक तापमान श्रीगंगानगर में 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राज्य में औसत आर्द्रता 30 से 70 प्रतिशत के बीच रही।
इससे साफ है कि बारिश की गतिविधियां कमजोर होने के साथ कई इलाकों में गर्मी और उमस का असर भी बना रह सकता है।
देश के 17 राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट
वहीं, देश के कई राज्यों में 1 सितंबर को मौसम खराब रहने का अनुमान है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम, सिक्किम और केरल में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी बताई गई है।
कई इलाकों में हवा की रफ्तार 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। पूर्वी भारत में कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है।
पहाड़ी क्षेत्रों में लैंडस्लाइड का खतरा
पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भी भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में लैंडस्लाइड और अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
मौसम खराब होने की स्थिति में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसमी सिस्टम
मौसम में बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में बन रही मौसमी गतिविधियों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। गंगा के मैदानी क्षेत्र, पश्चिम बंगाल से सटे उत्तरी तटीय ओडिशा और उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के आसपास कम दबाव का क्षेत्र विकसित होने की स्थिति बताई गई है।
इसके अलावा पूर्वोत्तर असम और आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण भी मौजूद है।
किसानों के लिए मौसम पर नजर रखना जरूरी
तेज हवाओं और बारिश की संभावना वाले क्षेत्रों में किसानों को फसलों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। वहीं राजस्थान में फिलहाल व्यापक बारिश का अलर्ट नहीं होने से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सितंबर की शुरुआत अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है।






