राजस्थान में फिलहाल मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना हुआ है, लेकिन अब मानसून की गतिविधियों में दोबारा बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने नए कम दबाव के क्षेत्र और हवाओं के बदलते रुख के कारण 11 सितंबर से पूर्वी राजस्थान में बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।
भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग में बारिश के आसार
11 सितंबर को भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
इस दौरान पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में मेघगर्जन और वज्रपात के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं।
मौसम में अचानक बदलाव को देखते हुए लोगों को बाहर निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर लेने की सलाह दी गई है।
13 और 14 सितंबर को बढ़ सकती है बारिश
आईएमडी के अनुसार 12 से 16 सितंबर के बीच राजस्थान में बारिश की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।
खासकर 13 और 14 सितंबर को कोटा और उदयपुर संभाग तथा आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश होने के संकेत हैं।
कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट
मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, असम, छत्तीसगढ़ और अरुणाचल प्रदेश में मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है।
कई क्षेत्रों में बारिश के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चलने की संभावना भी बताई गई है।
इन मौसमी सिस्टम का रहेगा असर
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण करीब 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई तक बना हुआ है।
उत्तर हरियाणा से बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र तक ट्रफ सक्रिय है, जो उत्तर प्रदेश और झारखंड से होकर गुजर रही है।
इसके अलावा मानसून ट्रफ जम्मू, देहरादून, बरेली, लखनऊ, अंबिकापुर और झारसुगुड़ा होते हुए बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है।
उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू क्षेत्र के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है।
किसानों के लिए भी मौसम अहम
बारिश और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए मौसम का यह बदलाव किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। खेतों में खड़ी फसलों और कृषि कार्यों पर बारिश व तेज हवाओं का असर पड़ सकता है।
लोगों को मेघगर्जन और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचने की सलाह दी जाती है।






