राजगढ़ तहसील के लंबोर खेड़ी निवासी भारतीय सेना के जवान जगवीर रेपसवाल की अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में मृत्यु के बाद शनिवार को उनकी पार्थिव देह सादुलपुर स्थित शहीद स्मारक लाई गई। यहां परिजनों ने सरकार से मांगों पर स्पष्ट आश्वासन मिलने तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। करीब पांच घंटे चली वार्ता के बाद सहमति बनने पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कराई गई।
गांव में सुबह से शोक का माहौल रहा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण शहीद स्मारक पहुंचे और दिवंगत जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की।
परिवार ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
पार्थिव देह शहीद स्मारक पहुंचने के बाद परिजनों ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें दिवंगत जवान को शहीद का दर्जा, परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति तथा पर्याप्त आर्थिक सहायता शामिल थी।
परिजनों का कहना था कि जब तक सरकार इन मांगों पर उचित आश्वासन नहीं देती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
पांच घंटे चली वार्ता, आश्वासन के बाद बनी सहमति
मामले की गंभीरता को देखते हुए सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, स्थानीय विधायक मनोज न्यांगली तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत की।
विधायक मनोज न्यांगली के अनुसार सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक वार्ता चली। उन्होंने बताया कि परिजनों और जनप्रतिनिधियों की ओर से शहीद का दर्जा, अनुकंपा नियुक्ति और आर्थिक पैकेज की मांग रखी गई थी। सरकार की ओर से इन मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने के बाद परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए सहमत हो गए।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि
दिवंगत जवान के भाई सुखवीर रेपसवाल ने भी सरकार से मांग की कि उनके भाई को शहीद का दर्जा दिया जाए और शहीद परिवारों को मिलने वाली सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
शहीद स्मारक पर विधायक मनोज न्यांगली, पूर्व सांसद रामसिंह कस्वा, पूर्व विधायक डॉ. कृष्णा पूनिया तथा लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे देवेंद्र झाझड़िया सहित कई जनप्रतिनिधियों ने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने सरकार से सैनिक परिवार की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया।
मौके पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस प्रशासन के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे और दिवंगत जवान को अंतिम विदाई दी।






