राजगढ़। चूरू जिले के नीमा गांव में रविवार को वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के अमर बलिदानी एवं सेना मेडल से सम्मानित दयानंद जाखड़ की प्रतिमा का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। वर्षों से ग्रामीणों द्वारा उठाई जा रही मांग पूरी होने पर गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, पूर्व सैनिकों, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री प्रेम सिंह बाजौर रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व सांसद रामसिंह कसवा तथा सादुलपुर विधानसभा क्षेत्र की भाजपा प्रत्याशी सुमित्रा पूनिया उपस्थित रहीं।
प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर सपूत को किया नमन
अतिथियों ने प्रतिमा का लोकार्पण कर अमर बलिदानी दयानंद जाखड़ को पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम् और जय हिंद के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
ग्रामीणों ने कहा कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, साहस और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देती रहेगी।
“शहीदों का सम्मान हर नागरिक का कर्तव्य”
मुख्य अतिथि प्रेम सिंह बाजौर ने कहा कि “देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाला व्यक्ति देवताओं से भी बढ़कर होता है।” उन्होंने कहा कि शहीदों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है और उनके जीवन से युवाओं को राष्ट्रभक्ति, सेवा और त्याग की प्रेरणा लेनी चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए योग, आयुर्वेद, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक शिष्टाचार अपनाने का भी आह्वान किया।
पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों की रही बड़ी भागीदारी
समारोह की अध्यक्षता भूतपूर्व सैनिक संघ अध्यक्ष सूबेदार मुकेश कुमार पुनिया ने की। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त सैनिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन योगाचार्य नरेंद्र भारतीय ने देशभक्ति कविताओं और प्रेरक प्रसंगों के साथ किया, जबकि आर्य समाज के भजनोपदेशक सुरेश आर्य अलीपुर की मंडली ने देशभक्ति और समाज जागरण से जुड़े गीत प्रस्तुत किए।
वीरांगना और अतिथियों का हुआ सम्मान
समारोह में अमर बलिदानी दयानंद जाखड़ की बहन धन्नी देवी का शॉल, स्मृति चिन्ह और वैदिक साहित्य भेंट कर सम्मान किया गया। इसके अलावा उपस्थित अतिथियों और नागरिकों को भी राष्ट्रभक्ति, स्वदेशी और महापुरुषों के जीवन से संबंधित साहित्य वितरित किया गया।
प्रतिमा स्थल पर दिनभर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।






