रतनगढ़ के सेठ सूरजमल जालान राजकीय जिला चिकित्सालय में अब मरीजों को जटिल सर्जरी के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने के लिए भामाशाह अरुण एवं हर्ष अजीतसरिया ने अपने किशन दयाल रामेश्वर लाल चैरिटी ट्रस्ट के माध्यम से 80 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग दिया है।
यह पहल क्षेत्र के समाजसेवी चम्पालाल उपाध्याय की सेवा भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से श्री गांधी बाल निकेतन के सचिव राजीव उपाध्याय द्वारा संचालित मेडिकल इक्विपमेंट परियोजना के तहत की गई है।
अब बिना बड़े चीरे के होंगे जटिल ऑपरेशन
इस सहयोग राशि से अस्पताल के लिए लेप्रोस्कोप, लेजर मशीन, एडवांस्ड एनेस्थीसिया सिस्टम, ईटीओ स्टरलाइजेशन यूनिट, फॉगर मशीन, आधुनिक ऑपरेशन टेबल, ब्लड वार्मर और कॉटरी मशीन सहित कई अत्याधुनिक उपकरण खरीदे गए हैं।
इन मशीनों की स्थापना के बाद लेप्रोस्कोपिक तकनीक से कम चीरे में जटिल ऑपरेशन, लेजर तकनीक से अधिक सटीक और अपेक्षाकृत कम दर्द वाली सर्जरी तथा उन्नत एनेस्थीसिया सिस्टम की मदद से जटिल ऑपरेशन सुरक्षित तरीके से किए जा सकेंगे। वहीं ईटीओ और फॉगर मशीन ऑपरेशन थिएटर को संक्रमणमुक्त रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
पहले ऑर्थोपेडिक, अब जनरल सर्जरी को भी मिला आधुनिक स्वरूप
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में भी अजीतसरिया परिवार ने लगभग 30 लाख रुपये की लागत से अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग के लिए सी-आर्म मशीन और अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए थे। इसके बाद अधिकांश ऑर्थोपेडिक मरीजों का उपचार स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सका।
अब नई मशीनों के आने से जनरल सर्जरी विभाग भी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और मरीजों को जयपुर, बीकानेर या निजी अस्पतालों में रेफर होने की आवश्यकता काफी हद तक कम होगी।
भामाशाह और चिकित्सकों ने जताई खुशी
भामाशाह अरुण एवं हर्ष अजीतसरिया ने कहा कि उन्हें अपने पूर्वजों की सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मातृभूमि के सरकारी अस्पताल में विश्वस्तरीय चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने का अवसर मिला है।
वहीं मेडिकल इक्विपमेंट प्रोजेक्ट के संस्थापक राजीव उपाध्याय ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की जरूरत के अनुसार आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें।
जनरल सर्जन डॉ. सुखवीर कस्वां ने कहा कि नई मशीनों से जनरल सर्जरी विभाग की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और मरीजों को उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।






