चूरू जिले के सादुलपुर कस्बे में एक निजी अस्पताल पर उपचार में कथित लापरवाही, गलत इंजेक्शन लगाने और जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोपों को लेकर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मिनी सचिवालय पहुंचकर उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में अस्पताल संचालक, चिकित्सक एवं संबंधित स्टाफ की भूमिका की जांच कराने के साथ अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, दवाइयों और स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता की भी जांच की मांग की गई है।
मरीज के परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
वार्ड नंबर 5 निवासी रणजीत कुमार ने बताया कि 16 जून की शाम उनकी पत्नी ज्योति कुमारी, जो वार्ड 5 की निवर्तमान पार्षद हैं, को हल्का पेट दर्द होने पर सामने स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आरोप है कि चिकित्सक ने सामान्य परेशानी बताकर इंजेक्शन लगाया, जिसके तुरंत बाद उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों का कहना है कि गंभीर स्थिति होने के बावजूद उन्हें रेफर कर दिया गया। इसके बाद मरीज को हिसार के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ।
जातिसूचक टिप्पणी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप
रणजीत कुमार ने आरोप लगाया कि अस्पताल संचालक और डॉक्टर ने उनके साथ जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रेफर करते समय मरीज की स्थिति से संबंधित गलत जानकारी दर्ज की गई तथा मूल ओपीडी पर्ची और दवाइयों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
परिजनों का आरोप है कि बिना आवश्यक जांच के गलत इंजेक्शन लगाए जाने से मरीज के शरीर में संक्रमण फैल गया।
निष्पक्ष जांच की मांग
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों, मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टर व स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता की जांच कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आया है। मामले की जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।





